24 News Update उदयपुर। शहर के विकास के लिए अपने घर छोड़ने वाले शक्तिनगर के 8 परिवारों का तीन साल लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। राज्य सरकार ने लंबे समय से अटकी फाइल पर मुहर लगाते हुए प्रभावितों को भूखंड आवंटित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकारी फाइलों का बोटल नेक हट गया है। तीन साल पहले शक्तिनगर में सड़क चौड़ीकरण (बोटलनेक हटाने) के लिए नगर निगम ने कुछ मकानों का अधिग्रहण किया था। लोगों ने शहरहित में सहमति देते हुए अपने घर छोड़ दिए और 30 फीट चौड़ी सड़क बन गई, लेकिन बदले में जमीन के लिए उन्हें वर्षों तक भटकना पड़ा।
सरकारी निर्णय के अनुसार 4 परिवारों को हिरणमगरी सेक्टर-11 में और 4 को नगर निगम परिसर में भूखंड दिए जाएंगे। हालांकि, इसके लिए लाभार्थियों को डिफरेंस अमाउंट जमा करना होगा।
राशि का ब्यौरा इस प्रकार है—
सुनील कालरा, कमला देवी, लाजवंती देवी – ₹5,73,302 (सेक्टर-11)
पुरुषोत्तम लीलानी – ₹1,24,916 (निगम परिसर)
ओमप्रकाश डोडेजा – ₹9,13,193 (निगम परिसर)
संजय पाहूजा – ₹69,910 (निगम परिसर)
स्वरूप, विनोद, अनूप, गौरव तुलसीजा – ₹1,69,307 (निगम परिसर)
नंदलाल बुधराज – ₹16.34 लाख (सेक्टर-11)
मनोज कालरा – ₹14.79 लाख (सेक्टर-11)
सुजाता कालरा – ₹17.35 लाख (सेक्टर-11)
इस फैसले से जहां प्रभावित परिवारों को राहत मिली है, वहीं उन्हें अब लाखों रुपए की राशि जमा कराने की नई चुनौती भी सामने है। तीन साल बाद मिला यह न्याय एक सवाल भी छोड़ गया है—क्या हर विकास योजना में आम नागरिक को पहले घर खोना और फिर अधिकार पाने के लिए लंबा इंतजार करना ही पड़ेगा?

