24 News Update नई दिल्ली। देशभर के शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अब टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास किए बिना न तो शिक्षक अपनी नौकरी में बने रह पाएंगे और न ही उन्हें पदोन्नति मिल सकेगी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि में पांच साल से ज्यादा समय बचा है, उन्हें हर हाल में TET क्वालिफाई करना होगा। ऐसा नहीं करने वालों को या तो इस्तीफा देना पड़ेगा या फिर अनिवार्य सेवानिवृत्ति स्वीकार करनी होगी।
पांच साल से कम सेवा वाले शिक्षकों को छूट
सुप्रीम कोर्ट ने उन शिक्षकों को राहत दी है जिनकी सेवा अवधि में अब केवल पांच साल शेष हैं। ऐसे मामलों में TET पास करने की बाध्यता लागू नहीं होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नियम अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होगा या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय बड़ी बेंच लेगी।
दरअसल, RTE एक्ट 2009 की धारा 23(1) के तहत शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता तय करने का अधिकार NCTE को है। 2010 में जारी नोटिफिकेशन में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य किया गया था। शिक्षकों को परीक्षा पास करने के लिए पांच साल का समय भी दिया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर नौ साल कर दिया गया। मद्रास हाईकोर्ट ने जून 2025 में फैसला सुनाया था कि 29 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए TET पास करने की जरूरत नहीं होगी, हालांकि पदोन्नति के लिए यह परीक्षा अनिवार्य रहेगी। इसी फैसले के खिलाफ अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने अब स्पष्ट कर दिया है कि नौकरी और प्रमोशन दोनों के लिए TET क्वालिफाई करना जरूरी होगा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: शिक्षक बने रहने और प्रमोशन के लिए TET पास करना अब जरूरी

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