24 News Update उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और सूचना तथा पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशालय सभागार में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (एक राष्ट्र, एक सदस्यता)” पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय समुदाय को इस योजना की महत्ता, तकनीकी प्रक्रियाएं और संभावित लाभ से अवगत कराना था।
कार्यक्रम में राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज कुमार महला, संघटक महाविद्यालयों के अधिष्ठातागण डॉ. धृति सोलंकी, डॉ. लोकेश गुप्ता, डॉ. सुनील जोशी और अनुसंधान सहायक निदेशक डॉ. रवि कांत शर्मा सहित विभिन्न संकायों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्घाटन
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. देवेंद्र जैन के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में ज्ञान संसाधनों की त्वरित उपलब्धता शोध की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। उन्होंने बताया कि वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी, जिससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शोध सामग्री सरल एवं त्वरित रूप में उपलब्ध होगी। इस कार्यक्रम में कुल 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो 50 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों से आए थे।
मुख्य अतिथि का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि यह पहल भारत सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक विद्यार्थी, शिक्षक और शोधार्थी को वैश्विक स्तर के उच्च गुणवत्ता वाले ज्ञान संसाधनों तक समान पहुंच प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि पूर्व में संसाधनों की उपलब्धता संस्थानों की आर्थिक क्षमता पर निर्भर करती थी, जिससे छोटे और दूरस्थ संस्थानों के शोधार्थी गुणवत्तापूर्ण सामग्री से वंचित रह जाते थे। यह योजना ज्ञान का लोकतंत्रीकरण सुनिश्चित करेगी और कृषि अनुसंधान को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर तक ले जाएगी।
तकनीकी और कार्यान्वयन पहलू
डॉ. एच. के. त्रिपाठी, प्रभारी कंसोर्टियम फॉर ई-रिसोर्सेज इन एग्रीकल्चर, ने योजना की पृष्ठभूमि, उद्देश्य और क्रियान्वयन प्रक्रिया पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पहल के माध्यम से संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के उच्च प्रभाव वाले शोध जर्नल, डेटाबेस और प्रकाशनों तक देशव्यापी पहुंच मिलेगी। डॉ. कृति जे. त्रिवेदी, वैज्ञानिक, सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र, ने कहा कि यह केवल सदस्यता योजना नहीं है, बल्कि एक समग्र डिजिटल ज्ञान अवसंरचना है जो नवाचार, शोध और अकादमिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करेगी। डॉ. दिनेश रंजन, प्रधान, सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र, ने उपयोग मॉनिटरिंग पोर्टल की जानकारी दी। इसके माध्यम से संस्थान यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि ई-संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो रहा है और नीति निर्माण में सहायता मिलेगी। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता, उद्धरण दर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा, जिससे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय एवं वैश्विक रैंकिंग में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
समापन और आभार
कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. एस. के. शर्मा, सहायक महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने सभी प्रतिभागियों, विश्वविद्यालय प्रशासन और सूचना तथा पुस्तकालय नेटवर्क टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए और कार्यक्रम का संचालन माला राम मोदी ने किया।

