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उपराष्ट्रपति भवन में सिंधी संविधान का विमोचन, उदयपुर के पांच प्रतिनिधियों ने बढ़ाया मेवाड़ का मान

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24 News Update नई दिल्ली/उदयपुर। सिंधी भाषा दिवस पर आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में भारतीय संविधान के सिंधी भाषा संस्करण का ऐतिहासिक विमोचन संपन्न हुआ। राष्ट्रीय आयोजन में उदयपुर से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लेकर मेवाड़ और राजस्थान के सिंधी समाज को राष्ट्रीय मंच पर गौरवपूर्ण उपस्थिति दिलाई।
इस गरिमामय समारोह में देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने संविधान के सिंधी संस्करण (देवनागरी एवं फारसी लिपि) का विधिवत विमोचन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी तथा इंदौर सांसद शंकर लालवानी सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
उदयपुर से शामिल प्रतिनिधिमंडल में सिंधी सेंट्रल युवा संगठन के अध्यक्ष विजय आहुजा, महासचिव मुकेश खिलवानी, उपाध्यक्ष कमल पाहुजा, अशोक लिंजरा तथा राजस्थान सिंधी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष हरीश राजानी शामिल रहे। इन पांचों प्रतिनिधियों की उपस्थिति को समाज के लिए विशेष सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान का अपनी मातृभाषा में उपलब्ध होना लोकतांत्रिक भागीदारी को और मजबूत करता है। सिंधी भाषा में यह संस्करण भाषाई विरासत के संरक्षण के साथ-साथ नई पीढ़ी को संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
कार्यक्रम में शामिल उदयपुर के प्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण बताते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति भवन में अपनी मातृभाषा में संविधान का विमोचन देखना गर्व का विषय है। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के साथ संवाद के दौरान सिंधी समाज की भाषा और संस्कृति के संरक्षण के प्रयासों को भी रेखांकित किया। विधि एवं न्याय मंत्रालय की यह पहल ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य देश के नागरिकों तक संविधान को उनकी अपनी भाषा में पहुंचाना है। इस पहल से सिंधी भाषी समाज को न केवल अपनी भाषा में संवैधानिक जानकारी मिलेगी, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती मिलेगी।

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