24 News Update उदयपुर। “अब समय आ गया है कि हम पारंपरिक कृषि से आगे बढ़ते हुए विविधिकरण और वैज्ञानिक नवाचार की ओर कदम बढ़ाएं। तिलहन और दलहन उत्पादन में पिछड़ने से हमें तेल के आयात पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे अरबों रुपए विदेशों में जा रहे हैं।” यह विचार महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (मप्रकृप्रौविवि) के कुलपति डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने वल्लभनगर स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र (KVK) परिसर में आयोजित किसान सम्मेलन में व्यक्त किए।
सम्मेलन का विषय था “वैज्ञानिक तरीके से मक्का उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन”, जिसमें उदयपुर सहित राजसमन्द, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ व भीलवाड़ा आदि नौ जिलों के 300 से अधिक प्रगतिशील किसान शामिल हुए।
ड. कर्नाटक ने कहा कि मक्का अब केवल परंपरागत फसल नहीं रही, बल्कि वैज्ञानिक प्रयासों से इसका स्वरूप ही बदल गया है। कोलंबस द्वारा लाया गया यह अनाज पहले चारे के रूप में इस्तेमाल होता था, लेकिन आज यह पॉपकॉर्न, बेबी कॉर्न, स्वीट कॉर्न के रूप में सिनेमा घरों और फाइव-स्टार होटलों तक पहुंच चुका है। मक्का से तेल, स्टार्च व इथेनॉल का निर्माण भी हो रहा है, जिसे ग्रीन फ्यूल के रूप में पेट्रोल में मिलाया जा रहा है।
भारत मक्का उत्पादन में किसी से कम नहीं: डॉ. सांई दास
“मेज मैन ऑफ इंडिया” के नाम से मशहूर मक्का बीज प्रजनक डॉ. सांई दास ने कहा कि भारत किसी भी दृष्टि से अमेरिका और चीन से पीछे नहीं है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण चुनौतियाँ हैं। उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि मक्का उत्पादन के लिए समय पर सिंचाई, पौध विकास के विशेष चरणों पर उर्वरक का उपयोग और खरपतवार नियंत्रण अत्यंत आवश्यक हैं।
फॉल आर्मी वर्म से सतर्क रहें किसान: डॉ. महला
कीट विज्ञानी डॉ. मनोज महला ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में फॉल आर्मी वर्म (FAW) नामक कीट ने मक्का को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। यह कीट कोमल पत्तियों को नष्ट कर देता है। उन्होंने फेरोमोन ट्रैप और बीजोपचार के माध्यम से इस पर नियंत्रण के उपाय सुझाए।
आईएसओ प्रमाण-पत्र से नवाजे गए कृषि वैज्ञानिक
सम्मेलन के दौरान कुलपति डॉ. कर्नाटक ने केवीके बांसवाड़ा के डॉ. बी.एस. भाटी, डॉ. आर.एल. सोलंकी (चित्तौड़गढ़), डॉ. सी.एम. बलाई (डूंगरपुर), डॉ. योगेश कनोजिया (प्रतापगढ़), डॉ. पी.सी. रेगर (राजसमन्द), डॉ. मनीराम (वल्लभनगर) और प्रो. लतिका व्यास (प्रसार शिक्षा निदेशालय) को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा प्रदत्त आईएसओ प्रमाण-पत्र देकर व मेवाड़ी पाग पहनाकर सम्मानित किया
मक्का उत्पादन में वैज्ञानिक नवाचार ही आत्मनिर्भरता की कुंजी: कुलपति डॉ. कर्नाटक

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