24 News Update उदयपुर।
रक्त चिकित्सा के क्षेत्र में सटीक, सुरक्षित और कम खर्च में प्रभावी उपचार को बढ़ावा देने की दिशा में उदयपुर के सरल ब्लड सेंटर ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। रोगियों के उपचार में रक्त के आवश्यक कम्पोनेन्ट्स के वैज्ञानिक उपयोग को लेकर “क्रायो प्रेसिपिटेट” की बढ़ती उपयोगिता पर शहर के प्रख्यात चिकित्सकों की उपस्थिति में एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य रक्त आधान की परंपरागत पद्धतियों में सुधार लाते हुए, रोगी को केवल वही कम्पोनेन्ट उपलब्ध कराना था, जिसकी उसे वास्तव में आवश्यकता हो—ताकि उपचार अधिक प्रभावी, सुरक्षित और किफायती बन सके।
पूरा प्लाज्मा नहीं, जरूरत का कम्पोनेन्ट ही मिलेगा
आमतौर पर देखने में आता है कि रक्त में मौजूद पूरे प्लाज्मा (FFP) को ही रोगी को चढ़ा दिया जाता है। इससे रोगी को अपेक्षित लाभ कम और अनावश्यक जोखिम अधिक होता है, क्योंकि कई ऐसे फैक्टर भी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिनकी आवश्यकता नहीं होती।
इसी समस्या के समाधान के लिए सरल ब्लड बैंक ने अपने यहां क्रायो प्रेसिपिटेट मशीन स्थापित की है, जिसके माध्यम से रक्त के प्रत्येक कम्पोनेन्ट को अलग-अलग किया जाता है और रोगी को केवल आवश्यक कम्पोनेन्ट ही दिया जाता है।
इस अत्याधुनिक सुविधा के साथ सरल ब्लड बैंक दक्षिणी राजस्थान का पहला ब्लड सेंटर बन गया है, जिसे “क्रायो प्रेसिपिटेट” सहित सभी प्रकार के रक्त कम्पोनेन्ट्स तैयार करने का लाइसेंस प्राप्त है।
सितंबर 2025 की राज्यस्तरीय कार्यशाला का अगला कदम
यह कार्यशाला सितंबर 2025 में सरल संस्था द्वारा आयोजित “ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में प्रगति” विषयक राज्यस्तरीय कार्यशाला में हुए गहन विचार-विमर्श का व्यावहारिक क्रियान्वयन है।
इसका उद्देश्य न केवल चिकित्सकों को नवीन तकनीक से अवगत कराना था, बल्कि आमजन को भी यह समझाना था कि आधुनिक रक्त चिकित्सा किस प्रकार मरीजों के जीवन को सुरक्षित बना सकती है।
स्वागत उद्बोधन: 17 वर्षों की सेवा, एक नई उपलब्धि
कार्यक्रम की शुरुआत में सरल संस्था के मानद सचिव सीए (डॉ) श्याम एस. सिंघवी ने सभी चिकित्सकों का स्वागत किया।
उन्होंने बताया कि पिछले 17 वर्षों से अधिक समय से संचालित सरल ब्लड सेंटर को दक्षिणी राजस्थान के प्रथम ब्लड सेंटर के रूप में “क्रायो प्रेसिपिटेट” तैयार करने का लाइसेंस प्राप्त हुआ है।
उन्होंने जानकारी दी कि इस तकनीक के लिए संस्था ने “रेमी मेक” कंपनी का अत्याधुनिक थाविंग बाथ उपकरण खरीदा है।
हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक रोगियों के उपचार में क्रायो प्रेसिपिटेट का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा था और चिकित्सकीय प्राथमिकता अक्सर एफएफपी को ही दी जाती रही।
एफएफपी बनाम क्रायो प्रेसिपिटेट: अंतर स्पष्ट किया
ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ नरेंद्र मोगरा ने पीपीटी के माध्यम से क्रायो प्रेसिपिटेट की वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उपयोगिता को विस्तार से समझाया।
उन्होंने बताया कि क्रायो प्रेसिपिटेट में—
- फाइब्रिनोजन की उच्च मात्रा
- कॉग्यूलेशन फैक्टर VIII और XIII
- वॉन विलेब्रांड फैक्टर
- फाइब्रोनेक्टिन
प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं, जबकि इसमें अनावश्यक प्रोटीन की मात्रा बेहद कम होती है।
क्रायो प्रेसिपिटेट की कुल मात्रा मात्र 15 मिलीलीटर होती है, जिससे मरीज को अतिरिक्त द्रव भार का खतरा नहीं रहता।
किन स्थितियों में है सबसे प्रभावी
डॉ मोगरा ने बताया कि क्रायो प्रेसिपिटेट का उपयोग—
- अत्यधिक रक्तस्राव
- डीआईसी (Disseminated Intravascular Coagulation)
- सर्जिकल व एक्सीडेंटल ट्रॉमा
- किडनी फेलियर
जैसी गंभीर स्थितियों में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है।
इसके विपरीत, एफएफपी की 180 मिलीलीटर मात्रा शरीर में जाने से विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में सर्कुलेटरी ओवरलोड का खतरा बढ़ जाता है।
कम लागत, ज्यादा सुरक्षा
डॉ मोगरा ने यह भी स्पष्ट किया कि एफएफपी की तुलना में क्रायो प्रेसिपिटेट की लागत कम होती है।
साथ ही इसकी कम मात्रा के कारण ABO अनुकूलता (ब्लड ग्रुप मैचिंग) की आवश्यकता भी नहीं रहती, जिससे आपातकालीन स्थितियों में उपचार और तेज हो जाता है।
उन्होंने चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे रोगियों के हित में प्राथमिकता के आधार पर क्रायो प्रेसिपिटेट का उपयोग करें।
चिकित्सकों का समर्थन, भविष्य में क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद
कार्यशाला में उपस्थित वरिष्ठ चिकित्सकों—
डॉ बी.एस. बंब,
रक्त चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ संजय प्रकाश,
मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ सचिन जैन,
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ एन.के. जोशी,
डॉ कल्पेश चौधरी एवं डॉ विनोद पोरवाल
ने अपने अनुभव साझा करते हुए क्रायो प्रेसिपिटेट के अधिकतम उपयोग पर बल दिया।
चिकित्सकों ने एकमत से कहा कि इस तकनीक से आने वाले समय में रक्त चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है।
सेवा भावना और सम्मानपूर्वक विदाई
संस्था के सह-सचिव संयम सिंघवी ने बताया कि सेवारत कर्मियों का दीर्घकालीन जुड़ाव सरल संस्था की पहचान रहा है।
उन्होंने बताया कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे चिकित्साधिकारी डॉ सुरेश डांगी एवं डॉ प्रांशु शर्मा को अपरिहार्य कारणों से विलग होने पर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।

