24 News Update पाली/सूरत। 13 वर्षीय आगम जैन ने वैराग्य का मार्ग चुना है, जो समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है। टेक्सटाइल कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले आगम 23 अप्रैल को पालीताणा में जैन दीक्षा ग्रहण करेंगे। पाली जिले में 6 अप्रैल को तेरापंथ भवन में आगम के सम्मान में ‘सांझी’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। आगम के पाली पहुंचने पर भव्य वरघोड़ा भी निकाला गया, जिसमें परिवार और समाजजन उत्साह से झूमते नजर आए।
करोड़ों के कारोबार का वारिस, अब संयम की राह
आगम के पिता दिलीप जैन सूरत में ‘डीके टेक्सटाइल इंडस्ट्री’ के नाम से व्यवसाय करते हैं, जिसका सालाना टर्नओवर करीब 9 से 10 करोड़ रुपए है। भौतिक सुख-सुविधाओं के बीच पले-बढ़े इस परिवार के लाडले ने अब संन्यास का मार्ग चुन लिया है।
6 साल की उम्र में जगा वैराग्य का भाव
परिवार के अनुसार, आगम के भीतर वैराग्य का भाव तब जागा जब वह महज 6 साल का था। जैन संत रत्नचंद्र सुरीश्वर महाराज के प्रवचनों से प्रभावित होकर उसने सांसारिक जीवन से दूरी बनाने का निर्णय लिया।
48 दिन की कठिन तपस्या से मिली मंजूरी
परिवार ने उसकी दृढ़ता परखने के लिए ‘उद्यापन तप’ कराया। 8 वर्ष की उम्र में आगम ने 48 दिनों तक कठोर तपस्या की—नंगे पैर विहार, केवल गर्म पानी का सेवन और साधु जीवन के नियमों का पालन। इस परीक्षा में सफल होने के बाद परिवार ने दीक्षा के लिए सहमति दी।
4500 किमी पैदल विहार, 5 साल गुरुकुल में अध्ययन
चौथी कक्षा के बाद आगम ने औपचारिक शिक्षा छोड़ दी और पिछले 5 वर्षों से जैन संतों के सान्निध्य में रहकर धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया। इस दौरान उसने मुंबई, पालीताणा, सूरत और गिरनार सहित विभिन्न क्षेत्रों में करीब 4500 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की।
‘असली सुख वैराग्य में’—आगम जैन
आगम का कहना है कि संसार के सभी रिश्ते नश्वर हैं और सच्चा सुख वैराग्य तथा भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलने में है।

