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कलश यात्रा के साथ डोरे नगर में रामकथा का शुभारंभ, उमड़े सैकड़ों श्रद्धालु

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– श्री राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में चल रही रामकथा  

24 News Update उदयपुर।  
सर्वेश्वर महादेव मंदिर, डोरे नगर, सेक्टर 3 में श्री राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में पुष्कर दास महाराज द्वारा संगीतमय रामकथा का शुभारंभ बुधवार को हुआ । सबसे पहले सर्वेश्वर महादेव मंदिर में रामायण की पोथी ओर कलश का पूजन विधि विधान से किया गया । बाद में पोथी को भगवान भोलेनाथ के चरणों में रखकर यात्रा का शुभारंभ किया गया। मार्ग में सभी क्षेत्र वासियों ने जगह जगह पुष्प वर्षा करते हुए यात्रा का आदर पूर्वक सम्मान किया । महिलाओं ने अपने सिर पर कलश लेकर यात्रा में बढ़ चढ़ कर भाग लिया। सभी महिलाएं भजनों पर झूमते हुए नृत्य करती हुई पूरे मार्ग में यात्रा में सम्मिलित हुई। आगे कथा प्रांगण में सर्वेश्वर महादेव मंदिर समिति के सभी सदस्यों ने पोथी पूजन व दीप प्रज्वलित के साथ कथा व्यास का सम्मान किया । प्रथम दिन महाराज ने कहा कथा का दान सबसे बड़ा दान है। कथा करवाना सबसे बड़ा उपकार का कार्य है । सत्संग का शब्द किसी को लग जाता है तो जनम जनम सुधर जाता है । भगवान शंकर अगस्त ऋषि के आश्रम में जाते हैं कथा के लिए ।
 नित्य कथा श्रवण करने से हरि हमारे हृदय के अंदर आता है, राम की कथा अपार है । परमात्मा आनंद स्वरूप है,  इसलिए हम कथा में आनंद लेने आते है। हमारा जीवन भी आनंद की खोज है, महापुरुषों ने ग्रंथों के माध्यम से मनुष्यों को जागने का प्रयास किया। रामायण हमारी समस्या का जवाब देती है । ग्रन्थ की शरण में आने से हमारे हर प्रश्न का जवाब मिलता है । हम सत्कर्म भगवान को अर्पण करते तभी संतों का संग ओर सत्संग मिलता है। सत्संग का मतलब सभी शास्त्रों का सार, कथा के सूत्रों को दवा की तरह रोजाना श्रवण करने की जरूरत है। आजकल कथा के आयोजन जगह जगह हो रहे है लेकिन कथा के मर्म को समझने वाले अधिक नहीं है । कथा आत्मनुरंजन के लिए हो लेकिन मनोरंजन प्रधान होने से सत्संग की महिमा घट जाती है । महाराज ने कहा सत्य का संग करना ही सत्संग कहलाता है । सत्संग से विवेक प्राप्त होता है,  आगे महाराज ने राम चरित मानस शब्द की व्याख्या की ।
संयोजक विठ्ठल वैष्णव ने बताया कि बुधवार को कथा में डॉ अनुष्का संस्थान के सचिव राजीव सुराणा, देवी सिंह गहलोत, गोपाल सैनी, मनोहर सिंह चौहान, अमर सिंह, ललित सिंह कच्छवाहा, लव शर्मा, दामोदर सैनी, शिव शंकर गौड़, संजय पुजारी आदि उपस्थित रहे ।

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