24 News Update उदयपुर। राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय का 40वां स्थापना दिवस सोमवार को कृषि महाविद्यालय के कृषि भवन में गरिमामय वातावरण में उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम रहे, जिन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को केंद्र में रखते हुए युवाओं को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का आह्वान किया। भारत विश्व कल्याण की भूमि है : निंबाराम मुख्य अतिथि निंबाराम ने शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक उद्बोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सदैव विश्व कल्याण की भावना से प्रेरित रहा है। उन्होंने कहा कि भारत किसी का विरोधी नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण का पथ प्रदर्शक है।निंबाराम ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय सनातन संस्कृति, जीवन मूल्यों और अध्यात्म के माध्यम से वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त छवि प्रस्तुत की और ‘दरिद्रनारायण की सेवा’ को ईश्वर सेवा बताया। युवाओं के स्वबोध और स्वावलंबन से बनेगा आत्मनिर्भर भारतअपने उद्बोधन में निंबाराम ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के आधार पर स्वावलंबन को बढ़ावा देकर ही बेरोजगारी जैसी समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने युवाओं से श्रम के प्रति श्रद्धा विकसित करने, कौशल अर्जन करने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। समाज परिवर्तन से ही राष्ट्र परिवर्तन संभवनिंबाराम ने कहा कि सत्ता के बल पर परिवर्तन नहीं आता, बल्कि समाज परिवर्तन से ही वास्तविक बदलाव संभव होता है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से यह आत्ममंथन करने का आग्रह किया कि 2027 के विकसित भारत में उसकी क्या भूमिका होगी।उन्होंने सामाजिक समरसता, छुआछूत उन्मूलन, राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और संविधान के प्रति निष्ठा बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। पंच परिवर्तन से सशक्त राष्ट्र का मार्ग प्रशस्त : प्रो. सारंगदेवोतकार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र चिंतन, मूल्यों और दायित्व बोध का अवसर है।उन्होंने बताया कि संस्थापक जनुभाई ने 21 अगस्त 1937 को विद्यापीठ की नींव रखी थी, जो 12 जनवरी 1987 को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ। उनका उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करना था।उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’—स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य और पारिवारिक संस्कार—को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। प्रगति और परिवर्तन का आधार शिक्षा : प्रो. कैलाश सोडाणीविशिष्ट अतिथि प्रो. कैलाश सोडाणी, सलाहकार (उच्च शिक्षा), राज्यपाल ने विद्यापीठ की विकास यात्रा, परंपरा और नवाचार की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही प्रगति और परिवर्तन का मूल आधार है।उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के समय देश में केवल 22 विश्वविद्यालय थे, जबकि आज यह संख्या 1150 से अधिक हो चुकी है, जो भारत के वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, इतिहास और आधुनिक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता बताई। समर्पित कार्यकर्ताओं से मिली विद्यापीठ को पहचान : भंवरलाल गुर्जरअध्यक्षता करते हुए कुल प्रमुख एवं कुलाधिपति भंवरलाल गुर्जर ने कहा कि विषम परिस्थितियों में 1937 में विद्यापीठ की स्थापना एक साहसिक कदम था।उन्होंने बताया कि 1987 में मात्र पांच पाठ्यक्रमों से शुरू हुआ यह विश्वविद्यालय आज 100 से अधिक यूजीसी मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय नेतृत्व के साथ-साथ समर्पित कार्यकर्ताओं को दिया। अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचारसमारोह में समाजसेवी हिम्मत सिंह झाला, पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा एवं रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली ने भी अपने विचार व्यक्त कर विद्यापीठ के शैक्षिक एवं सामाजिक योगदान की सराहना की। गरिमामय आयोजन और व्यापक उपस्थितिसमारोह से पूर्व अतिथियों ने मां सरस्वती, भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की। कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत के सानिध्य में संस्थापक जनुभाई की आदमकद प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में प्रो. सुमंत व्यास (कुलपति, बीकानेर वेटरनरी विश्वविद्यालय), प्रो. शिव शर्मा, डॉ. पारस जैन, डॉ. युवराज सिंह राठौड़, डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड़, प्रो. जी.एम. मेहता, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. गजेन्द्र माथुर, प्रो. मंजू मंडोत, डॉ. शैलेन्द्र मेहता, डॉ. हेमेंद्र चौधरी, डॉ. धमेन्द्र राजौरा, डॉ. हीना खान, डॉ. निरू राठौड़, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. बलिदान जैन, डॉ. निवेदिता, डॉ. सुनीता मुर्डिया, डॉ. भूरालाल श्रीमाली सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली ने किया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation व्यापारिक एकजुटता का सशक्त मंच बना अश्विनी बाजार व्यापार संघ का वार्षिक स्नेह मिलन विराट हिंदू सम्मेलन को लेकर उदयपुर में गूंजा सनातन का स्वर, प्रभात फेरी से हुआ जनजागरण