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अरावली संरक्षण को लेकर राजस्थान आदिवासी संघ का ज्ञापन, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग

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24 News Update खेरवाड़ा। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर राजस्थान आदिवासी संघ ने केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपत सिंह भगोरा के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन उपखंड अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तहत 100 मीटर से नीचे के भूभाग को अरावली क्षेत्र नहीं माना गया है, जिससे राजस्थान में अरावली पर्वत श्रृंखला से जुड़े बड़े भूभाग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संघ का कहना है कि राजस्थान का लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्रफल अरावली पर्वतमाला से प्रभावित है, जो पर्यावरण संतुलन, जलवायु नियंत्रण, वर्षा व्यवस्था तथा बढ़ते मरुस्थलीकरण को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। राजस्थान आदिवासी संघ ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह इस निर्णय के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे, ताकि अरावली क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही संघ ने संयुक्त रूप से जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न राजनीतिक दलों से ‘अरावली बचाओ अभियान’ के अंतर्गत प्रस्तावित आंदोलन को समर्थन देने की अपील भी की है। ज्ञापन प्रस्तुत करने के दौरान संघ के प्रदेश सचिव कुलदीप मीणा, प्रदेश महासचिव धूलेश्वर कलासुआ एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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