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पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने किया ‘गोल्डन हिस्ट्री ऑफ इंडियन आर्ट एंड कल्चर’ पुस्तक का विमोचन

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उदयपुर। इतिहास, कला और संस्कृति के क्षेत्र में शोध को नई दिशा देने वाली पुस्तक “गोल्डन हिस्ट्री ऑफ इंडियन आर्ट एंड कल्चर” का शुक्रवार सुबह उदयपुर के सर्किट हाउस में विमोचन किया गया। पंजाब के राज्यपाल Gulab Chand Kataria ने जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान इतिहासकारों, शिक्षकों और कला-जगत से जुड़े लोगों की उपस्थिति में पुस्तक का लोकार्पण किया।

यह पुस्तक उदयपुर के वरिष्ठ इतिहासकार और तक्षशिला विद्यापीठ संस्थान के संस्थापक निदेशक Dr. G. L. Menaria तथा नमस्ते इंडिया ग्रुप ऑफ आर्टिस्ट इंटरनेशनल के संस्थापक Sudhir S. Salunke द्वारा लिखित और संपादित की गई है। पुस्तक भारतीय कला, संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं के विभिन्न आयामों को समेटते हुए देश की सांस्कृतिक विरासत का व्यापक दस्तावेज प्रस्तुत करती है।

विमोचन समारोह के दौरान राज्यपाल कटारिया ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को दस्तावेज़ी रूप में संरक्षित करना समय की बड़ी आवश्यकता है। इस प्रकार के शोधपरक कार्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

कार्यक्रम में जनसंपर्क विभाग के निरीक्षक एल. डी. शर्मा, ख्यातनाम कलाविद विजयवर्गीय, इतिहासकार डॉ. मनोज भटनागर, चंदन सिंह खोखावत तथा तक्षशिला विद्यापीठ संस्थान के सचिव नवीन मेनारिया, एलडी शर्मा सहित अनेक इतिहासकार, शिक्षक और कला-संस्कृति से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

आयोजकों ने बताया कि नमस्ते इंडिया इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ आर्टिस्ट, पुणे और उदयपुर स्थित तक्षशिला विद्यापीठ संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन उदयपुर में किया जा चुका है। इनमें “महाराणा प्रताप महान”, “मेनार युगयुगान्तरः मेवाड़ के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय” तथा “द गोल्डन हिस्ट्री ऑफ इंडियन एजुकेशन” जैसी शोधपरक कृतियाँ शामिल हैं, जिन्हें इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है।

इस अवसर पर सुधीर एस. सालुंके ने बताया कि आगामी शिक्षक दिवस के अवसर पर सितंबर माह में तीन दिवसीय इंटरनेशनल एशियन आर्ट मीट आयोजित करने की योजना है। इस आयोजन में कला, साहित्य, संस्कृति और इतिहास के क्षेत्र में कार्य कर रही नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जाएगा। साथ ही देश-विदेश के इतिहासकारों और शिक्षाविदों को सम्मानित भी किया जाएगा।

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