टाउन हॉल से कलेक्ट्रेट तक निकाली रैली, केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी; अमेरिका के साथ कृषि व्यापार समझौता रद्द करने और चारों श्रम संहिताएं वापस लेने की मांग उदयपुर, 10 अगस्त। भारत छोड़ो दिवस की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय आह्वान पर सोमवार को उदयपुर में किसानों, मजदूरों और विभिन्न जन संगठनों ने विरोध दिवस एवं जेल भरो आंदोलन आयोजित किया। आंदोलन के तहत बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने टाउन हॉल से जिला कलेक्ट्रेट तक रैली निकाली और केंद्र सरकार की कथित जनविरोधी एवं कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से गिरफ्तारियां दीं। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौते को रद्द करने, चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने, किसानों को फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने तथा सार्वजनिक संपत्तियों और सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने सहित विभिन्न मांगें उठाईं। टाउन हॉल से कलेक्ट्रेट तक निकली रैली संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न किसान, मजदूर और जन संगठनों के कार्यकर्ता टाउन हॉल में एकत्र हुए। यहां से सभी कार्यकर्ता रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में नारे लगाए और किसानों, मजदूरों तथा आम जनता के हितों की रक्षा की मांग की। जिला कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सभा आयोजित की। सभा की अध्यक्षता इंटक के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राज श्रीमाली ने की। सभा में वक्ताओं ने केंद्र सरकार की आर्थिक एवं श्रम नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का असर सीधे किसानों, मजदूरों और आम जनता पर पड़ रहा है। किसानों-मजदूरों के हितों से समझौता स्वीकार नहीं सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां लगातार किसानों और मजदूरों के हितों के विपरीत तथा बड़े पूंजीपतियों एवं कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में बनाई जा रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि सरकार किसानों और मजदूरों के साथ गद्दारी तथा बड़े पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों के साथ दोस्ती का रवैया अपना रही है, जिसे देश की जनता स्वीकार नहीं करेगी। वक्ताओं ने कहा कि किसानों और मजदूरों के हितों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अमेरिका के साथ प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौते को किसान एवं मजदूर विरोधी बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की। चारों श्रम संहिताएं वापस लेने की मांग आंदोलनकारियों ने चारों श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों और हितों को प्रभावित करने वाली श्रम संहिताओं को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही वीबी रामजी अधिनियम को भी तत्काल वापस लेने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों, रोजगार की सुरक्षा और श्रम कानूनों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को श्रमिक संगठनों से बातचीत कर नीतियां बनानी चाहिए। एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग किसान संगठनों ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने के लिए कानून बनाने की मांग भी उठाई। वक्ताओं ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों की लंबे समय से चली आ रही विभिन्न मांगों का समाधान करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। किसान नेताओं ने कहा कि किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान किए बिना कृषि क्षेत्र को मजबूत करने का दावा अधूरा है। बिजली संशोधन विधेयक वापस लेने और निजीकरण रोकने की मांग आंदोलन के दौरान बिजली संशोधन विधेयक 2023 को वापस लेने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि बिजली क्षेत्र से जुड़े फैसलों का सीधा प्रभाव किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है, इसलिए बिजली व्यवस्था से संबंधित नीतियों में किसानों और आम जनता के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही सार्वजनिक संपत्तियों और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियां और सेवाएं देश की जनता की संपत्ति हैं तथा इनके निजीकरण से आम जनता और श्रमिकों के हित प्रभावित होंगे। व्यापार समझौतों में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रखने की मांग प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसानों, मजदूरों और देश की राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ जाने वाले किसी भी व्यापार समझौते को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में देश के किसानों, मजदूरों और आम जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। विशेष रूप से अमेरिका के साथ प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौते को लेकर वक्ताओं ने आशंका जताई और इसे किसान विरोधी बताते हुए तत्काल रद्द करने की मांग दोहराई। राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन सभा के बाद विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अमेरिका के साथ प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौते को रद्द करने, चारों श्रम विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लेने, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने तथा किसानों, मजदूरों और आम जनता से जुड़ी विभिन्न मांगों को तत्काल स्वीकार करने की मांग की गई। ज्ञापन में बिजली संशोधन विधेयक 2023 को वापस लेने, सार्वजनिक संपत्तियों एवं सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने और किसानों-मजदूरों तथा राष्ट्रीय संप्रभुता के विरुद्ध किसी भी व्यापार समझौते को स्वीकार नहीं करने की मांग भी शामिल रही। इन नेताओं ने किया संबोधित जिला कलेक्ट्रेट पर आयोजित सभा को इंटक के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राज श्रीमाली, ऐक्टू के प्रदेशाध्यक्ष एवं भाकपा-माले के राज्य सचिव कामरेड शंकरलाल चौधरी, माकपा जिला सचिव राजेश सिंघवी, भाकपा जिला अध्यक्ष हिम्मत छांगवाल, सीटू जिला अध्यक्ष हीरालाल सालवी, इंटक जिला अध्यक्ष नारायण गुर्जर, अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. चन्द्रदेव ओला, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रेम पारगी, एटक जिला अध्यक्ष सुभाष श्रीमाली, अखिल भारतीय किसान फेडरेशन की लीला शर्मा, एमसीपीआई के रामचन्द्र शर्मा, ऐडवा जिला अध्यक्ष गणपति देवी, ठेला व्यवसाय मजदूर यूनियन अध्यक्ष मोहम्मद निजाम, उपाध्यक्ष मोहम्मद शाहिद, रानू सालवी, मोहिनी माली, संतोष सालवी, महेंद्र खटीक, इंटक के हरीश जी एवं सुखविंदर, आदिवासी सभा के घनश्याम तावड़, किसान महासभा के प्रोफेसर एल. आर. पटेल, कच्ची बस्ती फेडरेशन के जगदीश सालवी, नानालाल कुमावत, छोगालाल सेन, माकपा के निवर्तमान पार्षद राजेश वसीटा तथा निर्माण मजदूर संगठन के शमशेर खान सहित विभिन्न संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया। सभा का संचालन हिम्मत छांगवाल ने किया। जेल भरो आंदोलन के तहत दी गिरफ्तारियां सभा के बाद विभिन्न किसान, मजदूर और जन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जेल भरो आंदोलन के तहत सामूहिक रूप से गिरफ्तारियां दीं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प जताया। आंदोलनकारियों ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन ने देश की जनता को अन्याय और दमन के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी थी। आज भी देश की जनता को जनविरोधी एवं कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ उसी एकजुटता के साथ संघर्ष करने की आवश्यकता है। वक्ताओं ने कहा कि किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों और आम जनता के हितों से जुड़े सवालों को लेकर आने वाले समय में भी आंदोलन को तेज किया जाएगा। उन्होंने देशभर में स्वतंत्र एवं एकजुट संघर्षों को मजबूत करने का आह्वान किया। जारीकर्ता — चन्द्रदेव ओला, जिला सचिव, भाकपा-माले, उदयपुर। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the 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