हरिद्वार/देहरादून, संवाददाता। शिक्षा और आध्यात्म के संगम के लिए प्रसिद्ध देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आज प्रोफेसर अमेरिकासिंह ने प्रो-चांसलर डॉ. प्रो. तन्मय पांड्या से शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों शिक्षाविदों के बीच शिक्षा के विविध आयामों पर सार्थक और गहन चर्चा हुई। विश्वविद्यालय परिसर व शांतिकुंज का भ्रमणप्रोफेसर अमेरिकासिंह के साथ श्री रमाकांत सिंह राठौर एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ शांतिकुंज का भी भ्रमण किया। प्रतिनिधिमंडल ने साधना केंद्र में आयोजित सत्र में भाग लेकर वहाँ के आध्यात्मिक वातावरण को निकट से अनुभव किया। ‘नवयुग का संविधान’ की प्रतिलिपि भेंटमुलाकात के दौरान प्रो-चांसलर डॉ. तन्मय पांड्या ने प्रोफेसर अमेरिकासिंह को ‘नवयुग का संविधान’ की एक प्रतिलिपि भेंट की। इसे पाकर प्रोफेसर अमेरिकासिंह भाव-विभोर हो उठे। उन्होंने कहा, “वाकई हम बदलेंगे, तो परिवार बदलेगा; परिवार बदलेगा, तो गाँव बदलेगा; गाँव बदलेगा, तो जिला बदलेगा; जिला बदलेगा, तो देश बदलेगा और देश बदलेगा, तो युग बदलेगा। ‘नवयुग का संविधान’ को पढ़कर मेरा विश्वास और दृढ़ हुआ है कि भारत एक महान देश है—यह विश्वगुरु था, है और सदैव विश्वगुरु रहेगा।” विश्वविद्यालय की संरचना देख हुए गदगदविश्वविद्यालय के सुव्यवस्थित परिसर, छात्रावास, प्रयोगशालाओं, ऑडिटोरियम और समग्र शैक्षणिक वातावरण को देखकर प्रोफेसर अमेरिकासिंह अत्यंत प्रभावित नजर आए। उन्होंने कहा, “यह राष्ट्र के लिए गौरव की बात है कि एक ऐसा विश्वविद्यालय है जहाँ लगभग 80 देशों के अंतरराष्ट्रीय छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहाँ की लैब सुविधाएं, छात्रावास, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, मेंटल हेल्थ व मेडिकल फैसिलिटी और मेस व्यवस्था अनुकरणीय हैं।” भारतीय ज्ञान परंपरा व नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रमप्रोफेसर अमेरिकासिंह ने विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पद्धति और नई शिक्षा नीति के अनुरूप डिजाइन किए गए पाठ्यक्रमों ने उन्हें अभिभूत किया है। उन्होंने कहा, “मेरे 48 वर्षों के विश्वविद्यालयीन अनुभव में पहली बार ऐसा संस्थान देखा है जहाँ आध्यात्मिक शिक्षा, आधुनिक विज्ञान और स्किल डेवलपमेंट का इतना सुंदर समन्वय है। मन प्रफुल्लित हो गया।” छात्रों से संवाद, व्यवस्थाओं की सराहनाप्रोफेसर अमेरिकासिंह ने देश-विदेश से आए छात्रों से संवाद किया और विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने मेस व्यवस्था, प्रयोगशालाओं, मानसिक स्वास्थ्य केंद्र, चिकित्सा सुविधाओं और आध्यात्मिक शिक्षा को विशेष रूप से “अनुकरणीय” बताया। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शिक्षा पर मंथनमुलाकात के दौरान प्रोफेसर अमेरिकासिंह और डॉ. तन्मय पांड्या के बीच राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के बदलते स्वरूप, वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा की दिशा और युवाओं को वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करने जैसे विषयों पर गंभीर मंथन हुआ। दोनों ने शिक्षा को मूल्य-आधारित, कौशलयुक्त और भारत-केंद्रित बनाने पर सहमति जताई। देव संस्कृति विश्वविद्यालय: एक परिचयगायत्री परिवार द्वारा स्थापित देव संस्कृति विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति, योग, आध्यात्म और आधुनिक विज्ञान का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। यहाँ स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और पीएच.डी. स्तर पर मनोविज्ञान, योग, पत्रकारिता, कंप्यूटर साइंस, पर्यावरण विज्ञान और भारतीय संस्कृति जैसे विषयों की शिक्षा दी जाती है। विश्वविद्यालय में 80 से अधिक देशों के छात्र अध्ययनरत हैं, जहाँ शिक्षा के साथ जीवन जीने की कला, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति पर विशेष बल दिया जाता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation महाकुंभ की ‘वायरल गर्ल’ की लव मैरिज चर्चा में: मोनालिसा ने फरमान खान से शादी का दावा, पुलिस से मांगी सुरक्षा