24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। उदयपुर के भुवाणा-प्रतापनगर बाईपास का नामकरण शहीद लेफ्टिनेंट अभिनव नागौरी मार्ग करने के मामले में भाजपा नेताओं का मसल पावर वाला वीडियो आपने जरूर देखा होगा। आपने ये भी देखा होगा कि किस तरह से कांग्रेस की युवा ब्रिगेड को पीटा गया, सुखेर थाने के बाहर कांग्रेस ने किस तरह से जोरदार प्रदर्शन किया। आपने इस मामले में मंत्रीजी का बयान भी सुन लिया होगा और शहीद अभिनव के पिता का बयान भी पढ़ लिया होगा। लेकिन आज हम आपको वो सब बताने जा रहे हैं जिसका ज़िक्र आज तक किसी ने नहीं किया है।

खास लॉबी की शहीद विरोधी मानसिकता, पिता का दर्द
बात सिर्फ एक सड़क की नहीं है बल्कि उस पूरी मेंटलिटी और उस खास लॉबी की है जो शहीद लेफ्टिनेंट अभिनव नागौरी का नाम आते ही अपनी ही पार्टी में विरोध में खड़े हो जाते हैं। जो नहीं चाहते हैं कि प्रतापनगर-सुखेर मार्ग का नामकरण शहीद नागौरी के नाम पर हो। जी हां, यह वो सच है जो शायद आप नहीं जानते हों। इस चिट्ठी को देखिए जो उस कार्यक्रम के दिन ही संभागीय आयुक्त को शहीद के पिता ने संभागीय आयुक्त को लिखी थी। शाम को कार्यक्रम था और दोपहर में शहीद के पिता संभागीय आयुक्त को यह चिट्ठी देकर आए। इसे गौर से पढ़िए, साफ लिखा है कि उनकी भावनाएं आहत हो गई हैं क्योंकि मार्ग पर लगे बोर्ड हटा दिए गए हैं। उनकी भावनाएं आहत हुई हैं क्योंकि कार्यक्रम की खबरों में शहीद का नाम ही नहीं लिया जा रहा है।

शहीद के पिता को इनवाइट ही नहीं किया
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि सब कुछ ठीक था तो शहीद के पिता को चिट्ठी क्यों लिखनी पड़ी? क्या यह सच नहीं है कि शहीद के पिता मार्ग के नामकरण नहीं होने पर बेहद चिंतित हुए थे? क्या यह भी सच नहीं है कि शहीद के पिता को उस कार्यक्रम में इनवाइट ही नहीं किया गया था? क्या यह सच है कि जिस मार्ग पर सुंदर सुंदर लाइटों का उद्घाटन मंत्रीजी करने आए उस रास्ते का नाम ही शिलापट्ट से गायब कर दिया गया था?? ये सवाल आने वाले दिनों में बहुत बड़े होने वाले हैं।

आवेश में आना लाजमी है, अति उत्साह ठीक नहीं
इस बारे में जब ट्वेंटी फोर न्यूज अपडेट से बातचीत में अभिनव के पिता धर्मचंद नागौरी ने बताया कि उन्होंने संभागीय आयुक्त एवं उदयपुर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष को पत्र लिखा था। “शहीद लेफ्टिनेंट अभिनव नागौरी मार्ग” के नाम का उपयोग नहीं करने से वे आहत थे। लेकिन वहां से बताया गया कि मार्ग का नाम नहीं बदला है। अभी तो केवल लाइटों का उद्घाटन हुआ है। विरोध करने वालों पर उनका कहना था कि शहीद सबका होता है, किसी परिवार का नहीं, शहीद का नाम नहीं होने पर आवेश में आना लाज़मी है लेकिन अति उत्साह में आना उचित नहीं है। वे खुद मंत्रीजी से मिले थे व मार्ग पर वे सभी बोर्ड पहले की तरह से लगाने व गली का नामकरण शहीद लेफ्टिनेंट नागौरी के नाम पर करने की मांग की। मंत्रीजी ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

भाजपा की हो गई किरकिरी, हाथ उठाने वालों पर उठे सवाल
उद्घाटन वाले दिन जब कांग्रेस पदाधिकारी अरमान जैन व अन्य मंत्रीजी से बात करने गए तो उनसे हाथापाई और धक्का-मुक्की कर दी गई। पुलिस की मौजूदगी में जब शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह ने भी हाथ आजमाए तो भाजपा की जबर्दस्त किरकिरी हो गई। लोग कहने लगे कि मसल पावर का यह जलवा कहीं जिलाध्यक्ष के राजनीतिक करियर को कलंकित न कर दे।

किसके दबाव में यूडीए अधिकारियों ने की अक्षम्य कारस्तानी
बहरहाल, पॉलिटिक्स अपनी जगह है लेकिन सवाल यह है कि क्या हमारा शहर और यहां के नेता इतने खुदगर्ज हो गए हैं कि एक सड़क को शहीद के नाम पर करने में राजनीति कर रहे हैं। ज़रा कॉमन सेंस लगाइए कि उद्घाटन शिलापट्ट पर शहीद का नाम यूडीए के अफसरों ने क्यों नहीं लिखवाया? किसका दबाव था? वो कौन है जो शहीद का नाम रोशन होते नहीं देखना चाहता? ज़रा सोचिए कि जिस रोड पर ओरनामेंटल पोल लग गए उस पर लगे बोर्ड आखिर कहां चले गए। हमारे पास इनसाइड स्टोरी तो यह है कि अपनी साख बचाने के लिए भाजपा के कई बड़े नेता शहीद के घर पर पहुंचकर परिवार को कन्विंस कर रहे हैं कि रोड का नाम नहीं बदला गया है। मगर क्या इससे सच छिप जाएगा?? इस बात पर गहराई से विचार होना चाहिए कि शहर में नेता जब चाहे मूर्तियां लगा देते हैं, सड़कों के नाम बदल देते हैं, मगर शहीद के नाम की एक सड़क आखिर क्यों उनकी आंखों को खटक रही है??

शहीद नागौरी के नाम पर रखा था सड़क का नाम
शायद कई लोगों को इस मामले का बैकग्राउंड पता नहीं होगा। तो हम बता देते हैं। हंसमुख, मिलनसार, युवा जोश से भरपूर, कट्टर राष्ट्रभक्त, जन-जन के लाडले शहीद लेफ्टिनेंट अभिनव नागौरी नौसेना में सबके चहेते शानदार पायलट थे। 27 मार्च 2015 को नौसेना के एक अभियान के दौरान उनकी शहादत हो गई तब उनकी याद में पूरा देश रोया था। शहीद के नाम पर भुवाणा-प्रतापनगर रोड व वर्तमान निवास कोटा बावड़ी का नाम बदलने के लिए ग्राम पंचायत भुवाणा ने प्रस्ताव 26 जनवरी 2016 को ही प्रस्ताव संख्या 14 के रूप में पारित कर दिया। यहां से प्रस्ताव यूआईटी में गया व 3 मार्च 2020 को सामान्य बैठक में बिंदु संख्या 26 के रूप में विचार-विमर्श के बाद भुवाणा-प्रतापनगर रोड व कोटा बावड़ी का नाम शहीद लेफ्टिनेंट अभिनव नागौरी के नाम पर रखने का निर्णय ले लिया गया। रोड का प्रस्ताव यूआईटी ने संभागीय आयुक्त को 22 जुलाई 2020 को भिजवाया। इस पर आयुक्त की अध्यक्षता में 19 जनवरी 2021 को सर्वसम्मति से जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की मौजूदगी में मार्ग का नाम शहीद नागौरी के नाम पर रख दिया गया। इस दौरान स्कूल का नाम भी 31 मार्च 2017 को शहीद के नाम पर रखा गया। जब रोड का नामकरण हुआ तब कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन आज भाजपाई दावा करते दिख रहे हैं कि उनकी सरकार ने नामकरण किया।

मार्ग दुस्त होते ही शहीद को भूल गए, अब करने लगे सीनाजोरी
इसके बाद जब भुवाणा-प्रतापनगर रोड चौड़ी हुई तो यूडीए ने खेल कर दिया। मार्ग के अधिकांश बोर्ड हट गए। भ्रष्ट अफसरों ने सरकारी दस्तावेजों व निमंत्रण पत्र पर और यहां तक कि शिलापट्ट में भी भुवाणा-प्रतापनगर मार्ग लिख दिया गया। हमारा सवाल ये है कि ये किसकी कारस्तानी थी। अब जो तर्क दे रहे हैं कि यह केवल ओरनामेंटल लाइटों का उद्घाटन था, वे जवाब दें कि यदि था तो भी शहीद का नाम गायब कैसे हो गया? जिसने किया, उससे किसने जवाब मांगा?? उस अफसर को किसने सस्पेंड किया?? यह कड़वा सच है जो शायद कई लोगों को नहीं पचेगा, मगर सच तो सच है। शहीद किसी नाम का मोहताज नहीं होता। बाद की पीढ़ी अगर उसके नाम पर एक सड़क नहीं रख सके, शिलापट्टों पर सम्मान नहीं दे सके, तो पूरी की पूरी पीढ़ी पर ही लानत है। लानत है ऐसे सिस्टम और ऐसी राजनीति पर, ऐसे अफसरों पर।

अफसरों को सस्पेंड क्यों नहीं किया
यह विरोध भाजपा बनाम कांग्रेस का नहीं है। यह विरोध शहीद के परिजनों बनाम यूडीए था, जिसको भाजपा ने राजनीतिक मुद्दा बना दिया। कारस्तानी यूडीए की थी। अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब कांग्रेस का विरोध शामिल हो गया तो भाजपाइयों ने अपनी लातों-घूसों वाली करतूत को छिपाने के लिए इसको राजनीतिक रंग दे दिया। कांग्रेसी भी चाहते तो विरोध को व्यापक स्तर देकर सही बात समझा सकते थे, मगर वहां भी खोखलापन दिखाई दिया।

मार खाने वाले बेल ले रहे थे, मारने वाले मंत्रीजी के साथ
ग़ज़ब बात तो यह है कि दूसरे दिन मार खाने वाले बेल लेकर बाहर आ रहे थे और हाथ साफ करने वाले मंत्रीजी के साथ बैठे थे। ये मंजर हमेशा शहर के राजनीतिक ज़ेहन में ताजा रहेंगे। भाजपा नेताओं ने क्या मंत्रीजी को मिसगाइड किया, यह भी सवाल है। सर्किट हाउस में मंत्रीजी को यह बात नहीं बताई गई कि अधिकारियों से गलती हो गई। बोर्ड हटा दिए, शिलापट्ट पर नाम नहीं है। हमेशा सिद्धांतों पर चलने वाला भाजपा यहां मात खा गई। बीएनएस की धाराओं का दुरुपयोग, पुलिस का कठपुतली बनाना जैसे विषय भी खूब चर्चा में रहे। कहा भी जाता है कि एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं और बाद में याद रखना पड़ता है कि कौन-सा झूठ कब व किसके सामने बोला था।


Discover more from 24 News Update

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

desk 24newsupdate's avatar

By desk 24newsupdate

Watch 24 News Update and stay tuned for all the breaking news in Hindi ! 24 News Update is Rajasthan's leading Hindi News Channel. 24 News Update channel covers latest news in Politics, Entertainment, Bollywood, business and sports. 24 न्यूज अपडेट राजस्थान का सर्वश्रेष्ठ हिंदी न्‍यूज चैनल है । 24 न्यूज अपडेट चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। 24 न्यूज अपडेट राजस्थान की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए बने रहें ।

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Discover more from 24 News Update

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Discover more from 24 News Update

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading