24 News Update जालोर। समाज की चिंता के नाम पर निजी जीवन के ठेकेदार बनने की कोशिश जालोर में पंचों को भारी पड़ गई। चौधरी समाज सुंधामाता पट्टी की पंचायत द्वारा महिलाओं के स्मार्टफोन उपयोग पर लगाया गया सामाजिक प्रतिबंध विरोध की आंच में टिक नहीं सका और आखिरकार पंचों को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। सवाल अब यही है—क्या पंच समाज की मर्यादा के रक्षक हैं या रोजमर्रा की जिंदगी के फैसलों के ठेकेदार? 21 दिसंबर को गजीपुर गांव में आयोजित समाज की बैठक में पंचों ने 15 गांवों की बहू-बेटियों के स्मार्टफोन उपयोग पर रोक लगाने का फैसला सुना दिया था। घोषणा के मुताबिक 26 जनवरी से महिलाओं को स्मार्टफोन रखने की मनाही होती और उन्हें केवल की-पैड मोबाइल तक सीमित रहना पड़ता। पढ़ाई करने वाली बच्चियों को भी मोबाइल सिर्फ घर के भीतर इस्तेमाल करने की सलाह दी गई थी। संस्कृति की आड़ में नियंत्रण की कोशिशपंचायत ने इस फैसले को ‘संस्कृति, बच्चों की आदतें और सामाजिक अनुशासन’ से जोड़कर पेश किया, लेकिन बाहर आते ही यह निर्णय महिलाओं की स्वतंत्रता और निजता में दखल के रूप में देखा गया। समाज के भीतर ही सवाल उठने लगे कि मोबाइल फोन जैसे व्यक्तिगत साधन पर नियंत्रण का अधिकार पंचों को किसने दिया।महिलाओं और युवाओं के बीच इस फरमान को लेकर नाराजगी बढ़ती गई। देखते ही देखते यह मुद्दा गांव की चौपाल से निकलकर सामाजिक विमर्श का विषय बन गया। विरोध बढ़ा तो बदला सुरआलोचना और असहमति के बढ़ते दबाव के बाद बुधवार को गजीपुर गांव में ही 14 पट्टी गांवों के पंचों की दोबारा बैठक बुलाई गई। बैठक के बाद पहले लिए गए निर्णय को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया गया।पंच नथाराम चौधरी ने कहा कि फैसला बच्चों की भलाई के लिए लिया गया था, लेकिन समाज ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने माना कि लोगों ने इसे महिलाओं पर प्रतिबंध के रूप में देखा, इसलिए इसे वापस लिया जा रहा है। बच्चों की चिंता या नियंत्रण की सोच?पंचों का तर्क रहा कि समाज की महिलाओं ने ही शिकायत की थी कि बच्चे स्कूल से लौटने के बाद मोबाइल में उलझ जाते हैं, न पढ़ाई करते हैं और न ही समय पर भोजन करते हैं। मोबाइल ऐप्स और वीडियो से बच्चों की आंखों और मानसिक स्थिति पर असर पड़ने की बात भी कही गई। इसी आधार पर सुझाव सामने आया कि घरों में स्मार्टफोन सीमित हों। लेकिन सवाल यह भी उठा कि बच्चों की आदत सुधारने का बोझ सिर्फ महिलाओं पर क्यों डाला गया और समाधान के नाम पर उन्हीं की आज़ादी पर रोक क्यों लगाई गई। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सीएमएचओ ने किया शहरी आयुष्मान आरोग्य केन्द्र वल्लभपुरा का औचक निरीक्षण लापिया में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी का जन्म दिवस को “सुशासन दिवस” के रूप में मनाया