24 News Update नई दिल्ली / जयपुर। राजस्थान में पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार को प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक कराने का मार्ग साफ हो गया है।
यह आदेश जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट के 14 नवंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुसार शहरी निकायों और पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि परिसीमन को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए संकेत दिया कि हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित समय-सीमा और दिशा-निर्देशों में कोई ऐसी कानूनी त्रुटि नहीं है, जो सर्वोच्च न्यायालय के दखल को आवश्यक बनाए।
सरकार ने जताई समय पर चुनाव कराने की प्रतिबद्धता
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि सरकार हाईकोर्ट द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर पंचायत और निकाय चुनाव संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है और इसकी प्रक्रिया प्रगति पर है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश स्थानीय स्वशासन से जुड़े संवैधानिक और वैधानिक ढांचे के अनुरूप तथा संतुलित है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप राज्यव्यापी परिसीमन प्रक्रिया को बाधित कर सकता है, जिससे वार्ड सीमाओं, मतदाता सूचियों और आरक्षण रोस्टर को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा होगी।
15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश
उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को लगभग 439 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक कराए जाएं।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि सरकार 31 दिसंबर तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करे, और एक बार परिसीमन का अंतिम नोटिफिकेशन जारी हो जाने के बाद उसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।

