उदयपुर। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) द्वारा शिराली भवन में “डॉ. अंबेडकर और मौजूदा संदर्भ में चुनौतियां” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर के आदर्शों, संविधान की रक्षा और वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रखर विचार व्यक्त किए।
जातिवाद और हिंदू राज के खतरे पर प्रहार
मुख्य वक्ता वरिष्ठ समाजवादी नेता अर्जुन देथा ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ‘एनिहिलेशन ऑफ कास्ट’ (जाति का विनाश) के पक्षधर थे, लेकिन आज कई संगठन उनका नाम तो लेते हैं, पर जाति की जंजीरों को और मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने अंबेडकर के हवाले से सचेत किया कि “हिंदू राज स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के लिए खतरा है।” देथा ने आरएसएस और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग मनुस्मृति को संविधान से ऊपर मानते थे, उन्हें अंबेडकर का नाम लेने का अधिकार नहीं है।
शिक्षा और अघोषित आपातकाल
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कुसुम मेघवाल ने कहा कि देश में आज अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति है। उन्होंने चिंता जताई कि जहाँ अंबेडकर ने शिक्षा को ‘शेरनी का दूध’ बताया था, वहीं पिछले एक साल में देश में एक लाख से अधिक सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। जनता को उनके अधिकारों से दूर रखने के लिए डॉ. अंबेडकर को केवल एक ‘भगवान’ के रूप में सीमित किया जा रहा है।
शोषकों के विरुद्ध संघर्ष ही सच्ची श्रद्धांजलि
माकपा जिला सचिव राजेश सिंघवी ने महिलाओं और श्रमिकों के अधिकारों में अंबेडकर की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हिंदू कोड बिल का विरोध करने वाले आज अपने स्वार्थ के लिए अंबेडकर का महिमा मंडन कर रहे हैं। सिंघवी ने जोर दिया कि “यदि डॉ. अंबेडकर आज जीवित होते, तो वे जेल में होते।” उन्होंने आह्वान किया कि जातिवाद और शोषण मुक्त समाज का निर्माण ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सामाजिक बदलाव के प्रणेता
- जगदीश चंद्र सालवी (सेवानिवृत्त प्रिंसिपल): उन्होंने कहा कि अंबेडकर को केवल संविधान निर्माता तक सीमित न रखकर सामाजिक बदलाव के प्रणेता के रूप में देखना चाहिए। वर्तमान में श्रम कानूनों में बदलाव उनके विजन के विरुद्ध है।
- हीरालाल सालवी (शहर सचिव, माकपा): उन्होंने राष्ट्रपति के मंदिर प्रवेश जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाए।
- सागर मीणा (शोधार्थी): इन्होंने डॉ. अंबेडकर के जीवन परिचय में उन्हें केवल दलितों का नहीं, बल्कि समस्त वंचितों और शोषितों का नेता बताया।
उपस्थिति: गोष्ठी में गुमान सिंह राव, शमशेर खान, रामचंद्र राव, दामोदर कुमावत, ताराचंद पालीवाल, विजय परमार, फिरोज अहमद, रघुनाथ सिंह, अमजद शेख और विजय वर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पूर्व पार्षद राजेंद्र वसीटा ने किया। अंत में दो मिनट का मौन रखकर डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

