24 News Update उदयपुरः बीमारी से बचाव वाली देखभाल और जनता की भागीदारी पर अपना फोकस बढ़ाते हुए पारस हेल्थ उदयपुर ने आकृति न्यूएज इवोल्यूशन फाउंडेशन के साथ मिलकर एक ‘स्पोर्ट्स इंजरी अवेयरनेस सेशन’ का आयोजन किया। इस सेशन को आयोजित करने का उद्देश्य खेलों में लगने वाली चोटों की जल्दी पहचान करना और समय पर इलाज को बेहतर बनाना था। इस सेशन में स्पोर्ट्स टीचर, कोच और फिजिकल ट्रेनिंग से जुड़े लोग शामिल हुए ताकि मैदान पर चोट लगने पर तुरंत मदद दी जा सके और जल्दी रिकवरी सुनिश्चित की जा सके।
पारस हेल्थ उदयपुर में आयोजित इस सेशन का शीर्षक “खेल चोटों से कैसे निपटें था। इसमें फिजिकल एजुकेशन टीचर और स्पोर्ट्स प्रोफेशनल ने हिस्सा लिया। सेशन में चर्चा सबसे ज्यादा होने वाली खेल से संबंधित चोटों, त्वरित फर्स्ट रिस्पॉन्स उपाय, रिहैबिलिटेशन तरीकों और गंभीरता से बचने के लिए जल्दी इलाज़ शुरू करवाने पर हुई।
सेशन में हिस्सा लेने वाले सभी लोगों को संबोधित करते हुए पारस हेल्थ उदयपुर के नी रिप्लेसमेंट सर्जन और आर्थोस्कोपी, सीनियर आर्थोपेडिक डॉ. आशीष सिंघल ने देर से होने वाले इलाज़ के खतरे पर जोर देते हुए कहा, “स्कूल और एमेच्योर लेवल पर खेल की चोटों पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है। अगर ध्यान भी दिया जाता है तो उनका गलत इलाज किया जाता है। इस देरी से अक्सर ठीक होने वाली चोटें कोनिक समस्या में बदल जाती हैं। चोट लगने के बाद कोच और टीचर आमतौर पर पहले खिलाड़ी से रूबरू होते हैं। अगर कोच और टीचरों को सही इलाज़ से संबंधित जानकारी दी जाए तो नतीजों में काफी बदलाव आ सकता है।”
इस सेशन में ऑर्थोपेडिक केयर में हुई प्रगति के बारे में भी जानकारी दी गई। इन प्रगति में न्यूनतम चीर-फाड़ वाली प्रक्रियाएं और सुरक्षित और तेजी से रिकवरी को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए स्ट्रक्चर्ड रिहैबिलिटेशन प्रोटोकॉल शामिल हैं।
इस तरह की पहल पर हॉस्पिटल के व्यापक दृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए पारस हेल्थ, उदयपुर के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. प्रसून कुमार ने कहा, ‘प्रिवेटिव केयर ऑपरेशन थिएटर के अंदर शुरू नहीं होती बल्कि यह जागरूकता से शुरू होती है। पीटी शिक्षकों और कोच के साथ सीधे जुड़कर हम चोटों को शुरुआती स्टेज में ही ठीक कर रहे हैं। शुरुआती मैनेजमेंट न केवल रिकवरी के नतीजों को बेहतर बनाता है, बल्कि युवा एथलीटों को लंबे समय तक बिना डर के खेल खेलना जारी रखने में भी मदद करता है।
सेशन में हुई चर्चा में घुटने, कंधे, टखने और मांसपेशियों में सबसे ज्यादा होने वाली चोटों के बारे में बात की गई, साथ ही यह भी बताया गया कि कब बिना सर्जरी के इलाज से ही राहत मिलती है और कब सर्जरी ज़रूरी हो जाती है। प्रतिभागियों को पूरी और स्थायी रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी और चोट के बाद रिहेबिलिटेशन की महत्वपूर्ण भूमिका से भी अवगत कराया गया।
चोटों से बचाव और रिकवरी में फिजियोथेरेपी के महत्व को समझाते हुए पारस हेल्थ उदयपुर के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ विशाल भट्ट ने कहा, “बहुत सी खेल से संबंधित चोटों को स्ट्रक्चर्ड वार्म-अप रुटीन, सही बॉडी मैकेनिक्स और खेल के अनुसार व्यवस्था करके रोका जा सकता है। फिजियोथेरेपी न सिर्फ रिहेबिलिटेशन में बल्कि शुरुआती जांच और गाइडेड रिकवरी में भी अहम भूमिका निभाती है। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम कोच और टीचरों को मैदान पर वैज्ञानिक तरीके से चोट को संभालने और समय पर इलाज़ सुनिश्चित करने में मदद करते हैं।”
इस तरह की पहल के जरिए पारस हेल्थ उदयपुर विशेष जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से हॉस्पिटल की दीवारों के बाहर भी हेल्थकेयर का विस्तार कर रहा है। इसके लिए हॉस्पिटल द्वारा रोकथाम, शिक्षा और सामुदायिक स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है।
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