24 News Update उदयपुर। उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज जो महाराणा भूपाल अस्पताल परिसर का ही अभिन्न हिस्सा है, वहां मेडिकल विद्यार्थियों की जरूरतों के लिए जनता के टैक्स के पैसों से एक शानदार सभागार बनाया गया है। विडंबना यह है कि यह सभागार आज विद्यार्थियों से ज्यादा उदयपुर के हाई पावर लोगों के इस्तेमाल का केंद्र बन चुका है। यहां आए दिन लगातार बड़े-बड़े आयोजन हो रहे हैं, जिनमें वीआईपी और वीवीआईपी की मौजूदगी रहती है।
इस सभागार तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता एमबी अस्पताल का मुख्य गेट है। यही वह गेट है जहां से उदयपुर संभाग ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से आने वाले गंभीर मरीज, उनके परिजन और पल-पल जिंदगी बचाने दौड़ती एम्बुलेंस प्रवेश करती हैं। लेकिन जैसे ही किसी वीआईपी या वीवीआईपी का कार्यक्रम होता है, अस्पताल का यह गेट बंद कर दिया जाता है और मरीजों को दूसरे रास्तों पर भटकने के लिए खदेड़ दिया जाता है। पुलिस पहरे में यह तमाशा तब तक चलता है, जब तक कार्यक्रम खत्म नहीं हो जाता या वीआईपी तशरीफ नहीं ले जाते।
बाहर से आए हैरान-परेशान मरीजों के लिए यह स्थिति किसी सजा से कम नहीं होती। एम्बुलेंस में जिंदगी और मौत से जूझ रहे मरीजों के लिए यह हालात कई बार बेहद भारी पड़ जाते हैं। इसके बावजूद उदयपुर में वीआईपी कल्चर के आदी हो चुके नेता, प्रशासनिक अधिकारी और संगठन हर बार यहीं कार्यक्रम रख लेते हैं। उन्हें न मरीज दिखते हैं, न अस्पताल की संवेदनशीलता। उनकी संवेदनशीलता मर चुकी है। अच्छा बुरा सोचने की क्षमता खत्म हो चुकी है।
अस्पताल अधीक्षक पर होनी चाहिए कार्रवाई
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर अस्पताल अधीक्षक मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाला ऐसा फैसला क्यों लेते हैं? यदि अस्पताल परिसर का यह सभागार सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम करने के लिए है, तो फिर इसे अस्पताल परिसर से बाहर क्यों नहीं किया जाता? क्यों नहीं इसका अलग स्वतंत्र रास्ता बनाया जाता?
यदि यह भी संभव नहीं है, तो अब समय आ गया है कि आरएनटी मेडिकल कॉलेज सभागार तक पहुंचने के लिए अलग वीवीआईपी एलिवेटेड रोड बनाई जाए, ताकि आम जनता और मरीजों को परेशान न होना पड़े और अस्पताल का मुख्य मार्ग बाधित न हो। बताया जा रहा है कि आरएनटी के अधीक्षक शहर के विभिन्न संगठनों, नेताओं और प्रशासन में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए इस सभागार में लगभग हर उस संगठन को कार्यक्रम की अनुमति दे रहे हैं, जिससे सत्ता प्रतिष्ठान में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ सके। इस चक्कर में अस्पताल की मूल आत्मा मरीज और उनकी जान अब पूरी तरह हाशिये पर चली गई है।
राज्य सरकार को इस पूरे मामले में तत्काल दखल देकर ऐसी व्यवस्था पर रोक लगानी चाहिए। अस्पताल अधीक्षक व मेडिकल कॉलेज के सर्वेसर्वा पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उनसे एक्सप्लेनेशन कॉल किया जाना चाहिए कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर तबादले जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। साथ ही यहां आने वाले अतिथि, वीआईपी और वीवीआईपी भी आत्ममंथन करें कि अस्पताल में आम लोगों को परेशान कर वे आखिर किस तरह के अनर्थ का हिस्सा बन रहे हैं। क्योंकि अस्पताल आयोजन स्थल नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने की आखिरी उम्मीद होता है।
Discover more from 24 News Update
Subscribe to get the latest posts sent to your email.