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अब वीडियोकॉच बस में आरामदायक सफर करने लगी शराब, गुजरात की शराबबंदी बन गई मुनाफे का गोरखधंधा

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24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। गुजरात, जहां कानूनन शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है, वहां शराब की तस्करी एक संगठित कारोबार का रूप ले चुकी है। ताजा मामला उदयपुर जिले से सामने आया है, जहां एक वीडियोकॉच बस में लाखों रुपये की अंग्रेजी शराब भरकर गुजरात ले जाई जा रही थी। पुलिस की सतर्कता और सूझबूझ से न केवल शराब से लदी बस पकड़ी गई, बल्कि पाँच अभियुक्तों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बस चालक भी शामिल है। 11 अप्रैल सुबह, जब उदयपुर से अहमदाबाद जा रहे वाहनों की चेकिंग टीडी थाना पुलिस द्वारा की जा रही थी, तभी एक सफेद विडियोकॉच बस ने पुलिस बेरिकेट्स को टक्कर मारकर भागने की कोशिश की। पुलिस ने तुरंत सरकारी और निजी वाहनों से पीछा शुरू किया। आखिरकार बस को ऋषभदेव थाना सर्कल में रोक लिया गया। बस चालक हरिओम माली, जो उदयपुर का रहने वाला है, से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने कबूल किया कि बस में बैठे चार युवक गुजरात ले जाने के लिए शराब लेकर चल रहे हैं। जांच में बस के लॉकर से दस बड़े बैग बरामद हुए, जिनमें विभिन्न ब्रांड्स की अंग्रेजी शराब की बड़ी मात्रा थी।

क्या मिला बस से?

पुलिस ने जब बैग खोले, तो उनमें ग्रीन लेबल की 24 बोतलें, पथ्या ब्रांड की 144 बोतलें, मैजिक मोमेंट की 58 बोतलें, व्हाइट लेस की 88 बोतलें, टर्बोग और किंगफिशर बीयर के कुल 144 कैन बरामद हुए। इस शराब की अनुमानित कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये आंकी गई है।

गिरफ्तारी और आरोप


बस चालक सहित गिरफ्तार किए गए अन्य चार युवक हैंः अनिल कुमार डामोर (असोडावाडा, खैरवाडा), लक्ष्मीशंकर डामोर (रोबिया, खैरवाडा), प्रवीण डामोर (रोबिया, खैरवाडा), सुनिल नरेश भाई पटेल (विजयनगर, साबरकांठा, गुजरात) इन पर राजकार्य में बाधा डालने, पुलिस पर हमला करने, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने और आबकारी अधिनियम की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
गुजरात में शराबबंदी और तस्करी का कारोबार
गुजरात में वर्ष 1960 से शराबबंदी लागू है, लेकिन यह प्रतिबंध अब केवल कागज़ों तक ही सीमित नजर आता है। राज्य में शराब की खपत का बाजार इतना बड़ा है कि राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश से शराब की खेप नियमित रूप से पहुँचाई जाती है। खास बात यह है कि तस्कर अब बसों, ट्रकों और यहां तक कि निजी कारों को भी इस काम में इस्तेमाल कर रहे हैं। विडियोकॉच बसें, जिनका उपयोग आमतौर पर लंबी दूरी की आरामदायक यात्रा के लिए होता है, अब तस्करी का सबसे ‘स्मार्ट’ जरिया बन चुकी हैं। शराब को बस के लॉकर में छिपाकर ले जाया जाता है, जिससे यह शक के घेरे में नहीं आती।

पुलिस की चौकसी और आमजन की सुरक्षा

कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने न केवल तस्करी रोकने में सफलता हासिल की, बल्कि बस में बैठी अन्य सवारियों को भी सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें दूसरी बस से रवाना किया गया। टीम का नेतृत्व टीडी थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह कर रहे थे, जिनकी विशेष भूमिका के चलते यह कार्रवाई सफल रही।
शराबबंदी वास्तविकता बनाम दिखावा– यह घटना इस बात का प्रमाण है कि शराबबंदी सिर्फ कानून के पन्नों में जीवित है, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जब तक सीमावर्ती राज्यों से गुजरात में शराब की आपूर्ति बेरोकटोक जारी रहेगी, तब तक यह गोरखधंधा चलता रहेगा। आवश्यकता है सख्त निगरानी, टेक्नोलॉजी के सहारे निगरानी और कड़े कानूनों के साथ-साथ ईमानदार क्रियान्वयन की। यह सिर्फ एक बस की कहानी नहीं है, यह उस पूरे सिस्टम पर सवाल है जो कानून होते हुए भी धंधे को पनपने देता है।

टीम प्रभारी व सदस्यः –

  1. श्री देवेन्द्रसिंह थानाधिकारी टीडी। (विशेष भूमिका)
  2. श्री कालूराम स.उ.नि. (विशेष भूमिका)
  3. श्री पुष्पराज कानि. 2486 (विशेष भूमिका)
  4. श्री राहुल कुमार कानि. 1333 (विशेष भूमिका)
  5. श्री अनिल कुमार कानि. 1748 ।
  6. श्री अनिल कानि.3193 ।

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