24 News Update कोटा। जन्म के दो दिन बाद ही सांसें थम गईं, हृदय ने काम करना बंद कर दिया, डॉक्टरों ने आपात स्थिति में पुनर्जीवन देकर वेंटिलेटर पर लिया—और फिर शुरू हुई 97 दिन लंबी जिंदगी की जंग। आखिरकार चिकित्सकों की सतत निगरानी और आधुनिक उपचार से नवजात स्वस्थ होकर घर लौट आया। मूल रूप से छींपा बडौदा क्षेत्र के भावपुरा निवासी जमनालाल लववंशी की पत्नी सविता ने 17 अक्टूबर को कोटा सरकारी अस्पताल में में पुत्र को जन्म दिया। जन्म के समय शिशु पूरी तरह स्वस्थ था और वजन लगभग 3 किलोग्राम था।
19 अक्टूबर को फीडिंग के दौरान दूध श्वास नली में चला गया (एस्पिरेशन), जिससे अचानक उसकी हृदयगति रुक गई। तत्काल चिकित्सकों ने सीपीआर देकर हृदय चालू किया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। इसके बाद मेडिकल कॉलेज और जेके लोन में 63 दिन तक उपचार चला, लेकिन शिशु सामान्य ऑक्सीजन पर स्वयं सांस नहीं ले पा रहा था।
स्थिति गंभीर बनी रहने पर परिजन उसे कोटा अस्पताल में ले गए। यहां ‘माय योजना’ के तहत निशुल्क उपचार किया गया। अस्पताल में 41 दिन भर्ती रहने के दौरान 34 दिन तक नेजल वेंटिलेशन तकनीक से श्वसन सहायता दी गई। डॉक्टरों के अनुसार वेंटिलेटर हटाने पर फेफड़े सिकुड़ रहे थे, छाती धंस रही थी और सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई हो रही थी, ऐसे में दोबारा सपोर्ट देना पड़ा।
अस्पताल निदेशक डॉ. नीता जिंदल ने बताया कि 97 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद स्वस्थ होने का यह अत्यंत दुर्लभ मामला है। डॉ. अंकुर जैन ने स्पष्ट किया कि ट्रेकियोस्टोमी के बजाय नाक के माध्यम से वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया, जो क्षेत्र में पहली बार सफल रहा। पिता जमनालाल लववंशी ने कहा कि कठिन दौर में चिकित्सकों ने उम्मीद नहीं छोड़ी। अंततः तीन माह से अधिक समय तक चले उपचार के बाद उनका बेटा पूरी तरह स्वस्थ है।
97 दिन मौत से जंग जीतकर लौटा नवजात: कोटा में जीवन की मिसाल

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