24 News Update लखनऊ। नए यूजीसी नियमों को लेकर देशभर में उठ रहे विरोध के स्वर के बीच अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा 1897 मूल ने भी कड़ा रुख अपनाया है। महासभा के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व कुलपति प्रोफेसर अमेरिका सिंह ने इन नियमों को शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने के लिए घातक बताते हुए केंद्र सरकार से इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की है।
प्रोफेसर अमेरिका सिंह ने बयान जारी कर कहा कि मोदी सरकार का नारा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास – एक भारत श्रेष्ठ भारत” इन नए यूजीसी नियमों से कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा सर्व समाज पर जबरन ऐसे नियम थोपे जा रहे हैं, जो समाज को जोड़ने की बजाय विभाजन की ओर ले जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ये नियम विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण को नुकसान पहुंचाएंगे और भविष्य में अपराध व आपराधिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे न केवल शिक्षण संस्थानों में वैमनस्यता बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा का मूल उद्देश्य भी प्रभावित होगा।
प्रोफेसर सिंह ने नए यूजीसी नियमों को “काला कानून” बताते हुए कहा कि यह न तो समाज के विकास में सहायक है और न ही शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाला। इसके उलट, यह देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार करता है।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा 1897 मूल की ओर से भारत सरकार से स्पष्ट शब्दों में आग्रह किया गया है कि इन नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, ताकि विश्वविद्यालयों की गरिमा, स्वतंत्र निर्णय प्रक्रिया और शैक्षणिक माहौल को सुरक्षित रखा जा सके।
महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते इस पर पुनर्विचार नहीं किया, तो देशभर में शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों में असंतोष और गहराएगा।
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