24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के स्ववित्त पोषित सलाहकार बोर्ड के अन्तर्गत कार्य करने वाले कर्मचारियों ने 11वें दिन उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार अपना धरना स्थगित किया। धरना तो खत्म हो गया मगर वीसी के घर पर सेवाएं देने और उस दौरान प्रताड़ना का अरोप लगाने के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस कठघरे में आ गए। खास तौर पर राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सीएम, पीएम, डिप्टी सीएम आदि को टैग करते हुए महिलाओं से अभद्रता पर वीसी के खिलाफ कार्रवाई करने व मामले की जांच करने की सख्त टिप्पणी की है। इसके बाद मामला और गरमा गया है। प्रतापनगर थाने में परिवाद के बाद भी पुलिस ने अब तक एफआईआर नहीं की है। जांच कितनी लंबी चलेगी यह तो वे ही जानें लेकिन सुविवि प्रशासन की ओर से अब तक मानकर चला जा रहा था कि प्रकरण को लोकल लेवल पर ही मैनेज कर लेंगे लेकिन अब मामला धीरे धीरे तूल पकड़ता जा रहा है। एसटी एससी संगठन तथा राजपूत संगठन भी इस मामले में लामबंद होने के संकेत मिल रहे हैं। इस मामले में सुविवि वीसी पहले ही साफ कर चुकी हैं कि उनके घर पर किसी भी एसएफएबी ने काम नहीं किया है। मगर तथ्य दूसरी ही दिशा में इशारा कर रहे हैं। पीड़ित महिला कर्मचारियों का कहना है कि वे सामान्य गरीब परिवारों से ताल्लुक रखती हैं। वे आखिर यह झूठ क्यों बोलेंगी कि वीसी के घर पर काम किया व वहां पर उनके साथ बुरा बर्ताव हुआ?? खुद सुविवि प्रशासन को कमेटी बनाकर इस मामले की जांच करनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपने एक्स ट्विटर संदेश में लिखा कि -मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु द्वारा आदिवासी छात्राओं को अभद्र गालियां देना, चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी के साथ मारपीट करना अत्यंत शर्मनाक कृत्य है। मैंने पहले भी सदन में यह मुद्दा उठाया था कि भाजपा सरकार ने राजस्थान की उच्च शिक्षा व्यवस्था को पंगु बनाने के लिए बाहरी राज्यों से अपने चहेते कुलगुरुओं की नियुक्ति की है। शिक्षा के मंदिरों में ऐसी तानाशाही और अमानवीयता स्वीकार्य नहीं है। मेरी राज्य सरकार से यह मांग है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, जिससे आदिवासी, दलित पीड़िता को न्याय मिले और दोषियों को संरक्षण देने वाले पूरे तंत्र का सच सामने आएं। गलती करे विश्वविद्यालय का प्रशासन और हर बार सजा भुगतें एसएफएबी कर्मचारी??? बहुत नाइंसाफी है इस हड़ताल को समाप्त कराने के कई स्तरों पर प्रयास किए गए थे मगर वे सफल नहीं हुए क्योंकि इससे पहले यही विश्वविद्यालय प्रशासन चार बार कर्मचारियों के साथ भयंकर वादाखिलाफी कर चुका था। नेताओं की पहल को भी नहीं माना गया और राज्य सरकार के आदेश को भी बार-बार अनदेखा किया गया। न्यायालय में भी सुविवि की ओर से यही पक्ष रखा गया कि हम तो एक्सटेंशन दे चुके हैं, एसएफएबी के कर्मचारी खुद हड़ताल पर हैं। जबकि मजबूत तथ्य यह है कि हड़ताल ही इस मुद्दे पर हुई थी कि जुलाई का दूसरा सप्ताह बीत रहा था और कर्मचारियों के पास ना तो आगे काम करने का कोई आदेश था, ना ही भविष्य का कोई आश्वासन। ऐसा पहले तीन बार हो चुका था। ऐसे में नौकरी किस भरोसे पर की जाए??? इसी बीच हड़ताल को बढ़ती देख आनन-फानन में सुविवि प्रशासन ने सितंबर तक कार्यादेश निकाल दिया और उल्टा कर्मचारियों को ही काम पर नहीं आने का दोषी करार देकर कार्रवाइयां शुरू कर दी। जानकारों का कहना है कि अब जब बार बार वेतन के लिए तरसाने का मुद्दा अगली पेशी में माननीय न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा तब इसका जवाब देना ही सुविवि प्रशासन को भारी पड़ सकता है। नई भर्ती वालों से भी होगा ऐसा ही बर्ताव??? इस बीच आज सुविवि प्रशासन ने विज्ञप्ति जारी करते हुए एसएफएबी कर्मचारियों की नई भर्ती शुरू कर दी। मगर सवाल फिर वहीं का वहीं रह गया कि अगर नई भर्ती करते भी हैं तब भी क्या नए कर्मचारियों को भी इसी तरह से वेतन के लिए तरसाया जाएगा जिस तरह से इनको तरसाया जा रहा है??? अगर हां तो फिर नौकरी कौन करने आएगा?? अगर नां तो फिर इन 300 कर्मचारियों आखिर क्या बिगाड़ा है जो इनको बार बार वेतन के लिए तरसाया जा रहा है। कर्मचारियों ने बार बार वेतन रोकने व आदेश जारी नहीं करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई व मामले की गहन जांच की मांग की है। सालवी ने कहा-जारी रहेगा संघर्ष मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय संविदा/एस.एफ.एस. कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष नारायण लाल सालवी ने बताया कि बुधवार को उच्च न्यायालय के द्वारा आए आदेश एवं कुलसचिव द्वारा जारी कार्यादेश की अनुपालना मैं 1 जुलाई 2025 से 30 सितंबर 2025 तक के लिए धरना स्थगित करते हुए सभी संविदा/एस.एफ.एस. कर्मचारियों को अपने-अपने कार्यस्थल पर ज्वाइन करने हेतु कहा गया। संविदा/एस.एफ.एस. कर्मचारियों की पांचों मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन से संघर्ष जारी रहेगा। संगठन किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं होने देगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation ममता प्रजापत को अटल टिंकरिंग लैब पर किया शोध पर शिक्षा संकाय से मिली पीएचडी उपाधि हरियाली अमावस्या पर लोहा बाजार में शनि जन्मोत्सव, चांदी की ड्रेस और नीलम जड़ित मुकुट में विराजे शनिदेव