24 News Update उदयपुर। महाराणा भूपाल (एमबी) अस्पताल में कार्यरत ठेका सफाईकर्मियों ने सोमवार सुबह विभिन्न मांगों को लेकर अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कई महीनों से समय पर वेतन नहीं मिल रहा और भविष्य निधि (पीएफ) तथा ईएसआई का अंशदान तकरीबन आठ–नौ महीनों से लंबित है। इससे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है।
प्रदर्शन के बाद ठेका संघर्ष समिति, उदयपुर तथा राष्ट्रीय ठेका मजदूर संघ (BMS संबद्ध) के प्रतिनिधियों ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.एल. सुमन को ज्ञापन सौंपा।
समय पर वेतन न मिलने और उपस्थिति में गड़बड़ी का आरोप
सफाईकर्मियों ने दावा किया कि निविदा शर्तों के अनुसार वेतन हर माह की 7 तारीख तक मिलना चाहिए, लेकिन पिछले कई महीनों से नियमित भुगतान नहीं किया जा रहा। पीएफ और ईएसआई जमा न होने से कर्मचारियों को राजकीय सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कई बार हाजिरी लगने के बावजूद ठेका स्टाफ की उपस्थिति में “एब्सेंट” दिखा दिया जाता है, जिससे नौकरी पर संकट मंडरा रहा है।
वर्दियां न मिलने और 8-8 घंटे की पारी लागू करने पर भी आपत्ति
कर्मचारियों ने बताया कि अब तक उन्हें निर्धारित वर्दियां उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
इसके अलावा अधीक्षक द्वारा ठेका कर्मियों के लिए 8–8 घंटे की पारी लागू करने के आदेश पर भी आपत्ति जताई गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान ड्यूटी व्यवस्था ही बहाल रखी जाए।
नर्सिंग स्टाफ पर उत्पीड़न का आरोप
ज्ञापन में कुछ नर्सिंगकर्मियों पर भी आरोप लगाए गए कि वे मूल कार्य के बजाय ठेका सफाईकर्मियों की निगरानी करते हैं, उन पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं, तथा वार्ड स्टाफ से कहकर कर्मचारियों की उपस्थिति कटवा देते हैं। इससे ठेका कर्मियों में असंतोष बढ़ रहा है।
पीएफ–ईएसआई तीन माह से लंबित, कर्मचारी बोझ तले दबे
ठेका फर्म द्वारा पिछले तीन महीनों से पीएफ और ईएसआई अंशदान जमा नहीं करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि भविष्य निधि का लेखा-जोखा न होने से उनका वित्तीय भविष्य प्रभावित हो रहा है।
समय पर समाधान नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी
संघ ने अधीक्षक को चेताया कि यदि मांगे समय पर पूरी नहीं की गईं तो ठेका कर्मी आगामी दिनों में धरना–प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, यदि हर माह की 7 तारीख तक वेतन भुगतान नहीं हुआ, तो अगले दिन यानी 8 तारीख को सभी ठेका कर्मी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।
समिति ने कहा कि सफाई व्यवस्था चरमराने की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होगी।
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