24 New sUpdate श्रीहरिकोटा। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) का साल 2026 का पहला अंतरिक्ष मिशन PSLV-C62 असफल हो गया। यह रॉकेट सोमवार सुबह 10.18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 16 सैटेलाइट्स को लेकर लॉन्च किया गया था, लेकिन उड़ान के दौरान तकनीकी समस्या सामने आ गई।ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने जानकारी दी कि लॉन्चिंग के तीसरे चरण (थर्ड स्टेज) में गड़बड़ी आने से रॉकेट अपने निर्धारित पथ से भटक गया, जिसके कारण मिशन को पूरा नहीं किया जा सका। इस मिशन के तहत EOS-N1 (अन्वेषा) समेत 14 अन्य सैटेलाइट्स को 512 किलोमीटर ऊंचाई पर सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में स्थापित किया जाना था। योजना के अनुसार इसके बाद रॉकेट के चौथे चरण (PS4) को दोबारा सक्रिय कर उसकी गति कम की जानी थी, ताकि उसे पृथ्वी की ओर मोड़ा जा सके और KID कैप्सूल को अलग किया जा सके। हालांकि, तीसरे चरण में आई खराबी के चलते यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।गौरतलब है कि इससे पहले भी 18 मई 2025 को लॉन्च किया गया PSLV-C61 मिशन तकनीकी कारणों से तीसरे चरण में ही असफल हो गया था। उस मिशन में EOS-09 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को 524 किमी की सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया जाना था।PSLV: सबसे भरोसेमंद रॉकेट, फिर भी झटकाPSLV को ISRO का सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल माना जाता है। अब तक इसकी 63 उड़ानें हो चुकी हैं, जिनमें चंद्रयान-1, मंगलयान, आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट जैसे ऐतिहासिक मिशन शामिल हैं। वर्ष 2017 में PSLV ने एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट्स लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था। अन्वेषा: हाई-टेक जासूसी सैटेलाइटEOS-N1 यानी अन्वेषा को DRDO ने विकसित किया है। यह अत्याधुनिक इमेजिंग क्षमताओं वाला स्पाई सैटेलाइट है, जो झाड़ियों, जंगलों या बंकरों में छिपी गतिविधियों को भी कैद करने में सक्षम है।यह सैटेलाइट हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग (HRS) तकनीक पर आधारित है, जो सामान्य कैमरों की तुलना में रोशनी के सैकड़ों सूक्ष्म रंगों को पहचान सकता है। इसी तकनीक के जरिए यह मिट्टी, पेड़-पौधों, इंसानी गतिविधियों और छिपे हथियारों तक की पहचान कर सकता है। डिफेंस सेक्टर के लिए अहम भूमिकाअन्वेषा का इस्तेमाल जंगलों की निगरानी, माइनिंग गतिविधियों पर नजर, ग्रीनहाउस गैसों के आकलन और खास तौर पर सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाना था।HRS तकनीक की मदद से किसी इलाके की मिट्टी का प्रकार, दुश्मन की मूवमेंट, छिपे हथियार या टैंकों के लिए सुरक्षित रास्तों की जानकारी पहले ही मिल सकती है। 3D इमेज और डेटा के जरिए युद्ध सिमुलेशन तैयार कर रणनीति भी बनाई जा सकती है।PSLV-C62 की असफलता से ISRO को जहां तकनीकी स्तर पर झटका लगा है, वहीं रक्षा और निगरानी से जुड़े इस अहम मिशन को लेकर भी अब नए सिरे से समीक्षा की जाएगी। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation फतहनगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 226 ग्राम अफीम व 555 ग्राम गांजा जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार अहमदाबाद में मकर संक्रांति पर छतें उगल रही सोना, 1.5 लाख तक पहुंचा टेरेस किराया