Site icon 24 News Update

भूपालसागर सीबीईओ कार्यालय में गूंजा महात्मा ज्योतिबा फुले का जीवन दर्शन: शिक्षा को आत्मसम्मान का हथियार बना वंचितों को मुख्यधारा में लाने का लिया संकल्प

Advertisements

24 News Update भूपालसागर (अरविंद गर्ग)। शिक्षा की अलख जगाकर समाज की जड़ता को तोड़ने वाले महान युगदृष्टा और समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती गुरुवार को स्थानीय मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अपूर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित विशेष संगोष्ठी में वक्ताओं ने फुले के जीवन संघर्षों को याद करते हुए उन्हें आधुनिक भारत में सामाजिक क्रांति का अग्रदूत बताया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने फुले के बताए मार्ग पर चलते हुए शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर उसे सामाजिक परिवर्तन और आत्मसम्मान का माध्यम बनाने का सामूहिक संकल्प दोहराया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी लक्ष्मण सिंह चुण्डावत ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा कि महात्मा फुले ने उस अंधकार युग में शिक्षा की मशाल जलाई थी, जब भारतीय समाज जातिवाद और रूढ़िवादिता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। उन्होंने रेखांकित किया कि फुले के लिए शिक्षा महज़ अक्षरों का ज्ञान नहीं, बल्कि शोषितों और वंचितों के लिए स्वाभिमान से जीने का एक अनिवार्य अधिकार थी। चुण्डावत ने आज के शिक्षक समुदाय और प्रशासनिक तंत्र का आह्वान किया कि वे फुले के आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ‘मिशन मोड’ में कार्य करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के कृत्रिम भेदभाव को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश का प्रसार करना ही इस महान विभूति के प्रति सच्ची कार्यांजलि होगी।
संगोष्ठी के दौरान विद्वान वक्ताओं ने महात्मा फुले के ‘सत्यशोधक समाज’ और महिला शिक्षा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए क्रांतिकारी योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर उन्होंने महिला सशक्तिकरण की जो बुनियाद रखी, उसी का परिणाम है कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। कार्यक्रम में फुले के जीवन से जुड़े उन प्रसंगों को भी साझा किया गया, जो विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और साहस के साथ समाज सुधार के संकल्प को सिद्ध करने की प्रेरणा देते हैं।
इस गरिमामय आयोजन में प्रशासनिक और शैक्षणिक जगत की कई विभूतियां उपस्थित रहीं, जिनमें प्रशासक प्यारचन्द भील, आर.पी. ओम प्रकाश पहाड़िया, प्रशासनिक अधिकारी राजेन्द्र आगाल, लेखाकार प्रेमशंकर रेगर, चिकित्सा विभाग से प्रवीण रेगर, कानाखेड़ा प्रधानाचार्य जाकिर हुसैन, कृष्ण कुमार शर्मा, राकेश जैन, योगेश टांक, राज माली सेवा संस्थान के कैलाश चन्द्र माली, देवी लाल माली, शिक्षक रविकुमार और शारीरिक शिक्षक राकेश चौधरी सहित शिक्षा विभाग के कई कार्मिक एवं गणमान्य नागरिक शामिल थे। सभी ने महात्मा फुले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके मानवतावादी संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का व्रत लिया।

Exit mobile version