24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर मार्ग योगिन्द्र गिरी तलहट पर स्थित प्रभुदास रामद्वारा योगेन्द्र गिरी में दिव्य चातुर्मास के अंतर्गत रामकथा में रामस्नेही संप्रदाय मेडता के उत्तराधिकारी संत रामनिवास शास्त्री ने रामकथा में लंका काण्ड के महाबली अंगद बालि का पुत्र के प्रसंग प्रस्तृत करते हुए बताया सभी को ज्ञात होता है धर्म क्या है और अधर्म क्या है जानते हुए भी अधर्म के मार्ग पर चल कर कुल समाज और राष्ट्र का बुरा करते है।
संत ने चौदह आदमी वाम मारगी,कंजूस, मूढ,दरिद्र मस्तिष्क से,वेदो ,बीमार अवस्था मे पडा और संतो का निन्दा करने वाले आदि मरण समान बताये । रावण के दरबार मे अंगद ने राम की शक्ति और भक्ति की क्षमता से रावण दरबार को अवगत कराया। सभा के बीच मे एक पाव ठोक ललकारा की मेरा यह पाव हटा दे तो राम अपनी सेना को लेकर चले जाएगे। विश्वास प्रबल हो तो जीवन के सभी आत्मिक कार्य प्रबल हो जाता है कोई भी योद्धा अंगद के पाव हटाना तो दूर हिला तक नही सका। पृथ्वी पाव छोड नही रही दाव पर पृथ्वी की पुत्री सीता है। तब रावण स्वयं आता है चरण पकडने जाता है तो अंगद ने पाव हटाकर कहते है कि चरण पकडने है तो राम के चरणो मे जाओ आपका उद्धार हो जाए। रावण ने नारियों मे आठ अवगुण को अवगत मंदोदरी के सम्मुख प्रकट अपनी दृष्टि से बताता है। राम चरण मे पडे चार मुकुट को अवगुण प्रतीत होते है। दोनो तरफ से भयंकर युद्ध होता है जिसमे रावण की आधी सेना और तीन दिन तीन चौथाई सेना समाप्त हो गई प्रौढ़ जब रावण को की बातो से समझाते है परन्तु अंधकार मे कुछ समझ नही हो पाती है युद्ध के दौरान लक्ष्मण मूर्छित और राम-विलाप पर राम के मन मे कई विलाप अनुकूल और प्रतिकूल आने लगे। हनुमान जब संजीवन बुट्टी को लेकर आते समय भरत द्वारा चलाए गए बाण प्रहार से हनुमान भरत सम्पर्क हुआ। कुम्भकर्ण का जगाया जिसने राम के अवतार महत्व को समझाया गया जिसे मद्यपान और मांस इत्यादि का सेवन कुम्भकर्ण को कराया अपनी बुद्धि के सन्तुलन को खो बैठ युद्ध की अग्रिम होता है और रण क्षैत्र मे विभीषण को कुल की रक्षा हेतु ज्ञान प्रदान करता है। राम और कुम्भकर्ण का भयंकर युद्ध होता है जिसमे राम ने दोनो हाथ काट दिए तब भी कुम्भकर्ण विशालकाय बिना सिर बिना हाथ घुमता फिर रहा था तभी उसके शरीर के दो टुकडे कर देह लीला को समाप्त कर दिया। दूसरो को उपदेश देना सरल होता स्वयं को अपनाना बहुत कठिन होता है। कथा के महाप्रसाद के यजमान धर्मीलाल-कन्हैयालाल कंसारा और संतोषदेवी-प्रकाश भावसार ने विप्रवर विनोद त्रिवेदी के मंत्रोच्चारण के साथ पोथी पूजन व आरती उतारी। कथा के दौरान कबीर पंथ की साध्वी भुवनेश्वरी, विशाखा दीदी और प्रभुदास धाम संत उदयराम व संत अमृतराम का सानिध्य लोकेश ठाकुर,कैलाश माकड,लालशंकर भावसार,मंगेश भाटी सहित टीम ने विभिन्न वाद्ययंत्रो पर संगत दी। इस अवसर नीरज शर्मा,ललिता भावसार,सविता भावसार,प्रिया भावसार,अनिता सुथार, सुगन्धलता शर्मा, राठौर,राजेन्द्र शुक्ला,रामकिशोर भावसार,पवन भावसार,गजेन्द्र प्रसाद भावसार,कौशल्या शर्मा, हेमन्त शुक्ला,हेमन्त सोमपुरा, माधुरी भावसार,अरूणा भावसार, मधुकान्ता सोमपुरा, रुपनारायण भावसार,लोकेश सोमपुरा,कमल शर्मा,सुखलाल रोत,हिरेन भावसार सहित नगर के कई समाजों के महिला पुरुष उपस्थित थे।
राम कथा में प्रस्तृत किया लंका काण्ड, महाबली अंगद-बालि का प्रसंग

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