24 न्यूज अपडेट, गोगुंदा। गोगुंदा क्षेत्र की अरावली पहाड़ियों में गुरुवार रात भक्ति, परंपरा और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। पलासमा गांव के पास स्थित जरगाजी नया स्थान तीर्थस्थल पर आयोजित भजन संध्या में हजारों श्रद्धालु उमड़े और कबीर की वाणी से पूरा वातावरण गूंज उठा। यात्रा का भव्य स्वागत, समाज की एकजुटता दिखीभीलवाड़ा के झरणा महादेव से शुरू हुई “महामेघ धर्म जागरण यात्रा” जब यहां पहुंची, तो जरगाजी विकास ट्रस्ट और मेघवाल समाज ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यात्रा का नेतृत्व कर रहे लेखक-पत्रकार भंवर मेघवंशी, मालजी का खेड़ा धूनी के संत लच्छीराम महाराज सहित सभी यात्रियों का सम्मान किया गया।सम्मान समारोह में भोजाराम सालवी, लीलाधर सालवी, दयाराम सालवी, नारायण लाल सालवी, लक्ष्मी लाल सालवी, नारायण सालवी (वीडीओ), सुरेश सालवी (सरपंच डेलास), देबी लाल मेघवंशी, परमानंद सालवी, लादू लाल सोनवा, बालू लाल मेघवंशी, नारायण मेघवंशी, भोमसा गोयल, सुरेश मेघवंशी (पत्रकार), रामचंद्र सालवी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों का अभिनंदन किया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भंवर मेघवंशी ने समाज में शिक्षा, एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समता को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया। ट्रस्ट उपाध्यक्ष नाना लाल मेघवाल ने जरगाजी और रघुनाथ पीर की जीवनी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। जब कबीर की वाणी ने बांधा समांरात 8 बजे भजन संध्या का शुभारंभ हुआ। पद्मश्री सम्मानित भजन गायक प्रहलाद सिंह टिपानिया ने जैसे ही “सकल हंस में राम बिराजे” और “मत कर माया रो अभिमान…” गाया, पूरा माहौल भक्ति में डूब गया। उन्होंने “गणा दिन सो लियो रे, अब तू जाग मुसाफिर जाग”, “हमें साहिब से मिलना है”, “कहां से आए कहां जाओगे”, “जरा हलके गाड़ी हांको मेरे राम गाड़ी वाले” जैसे कई भजन प्रस्तुत किए। हर भजन के साथ उसका सार समझाते हुए टिपानिया ने जीवन दर्शन को सरल भाषा में सामने रखा। श्रोताओं की तालियों से जरगाजी पर्वत गूंजता रहा। आस्था, इतिहास और संत परंपरा का केंद्रजरगाजी तीर्थस्थल अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि संत जरगाजी ने यहां तपस्या कर जीवित समाधि ली थी। इस स्थल पर संत जोग रिख, पद्मा रिख, जीवनदास, केवलदास, मोना रिख, ओघड़दास, भावदास, गुलाबदास, केसूदास, शंकरदास, मोहनदास और प्रेमदास सहित कई संतों ने साधना की। किवदंतियों के अनुसार, महाराणा कुम्भा के जन्म से भी इस स्थान का संबंध बताया जाता है। महाराणा मोकल को यहां संतों के आशीर्वाद से संतान प्राप्ति हुई थी, जिसके बाद कुंभा का जन्म हुआ। ट्रस्ट और समाज के पदाधिकारी रहे मौजूदइस अवसर पर ट्रस्ट अध्यक्ष गुलाबचंद मेघवाल, उपाध्यक्ष वेणीराम मेघवाल, सुरेश मेघवाल, मोहन लाल मेघवाल, कोषाध्यक्ष गुलाबचंद मेघवाल, बंशी लाल मेघवाल, पूर्व अध्यक्ष पूनाराम मेघवाल, नेमराज मेघवाल, मुकेश मेघवाल, राजकुमार मेघवाल, सुंदर मेघवाल, सोहन लाल मेघवाल, गणपत मेघवाल, मोहन लाल मेघवाल सहित समाज के अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। साथ ही उस्ताद प्रेम कुमावत और 78 वर्षीय मामा पहलवान ने शस्त्र प्रदर्शन कर लोगों को जागरूक रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम में संदीप श्रीमाली, डॉ. विनोद नायर, सुंदर सोलंकी, नितिन वसीटा, हेमंत अठवाल, कृष सेन, अहद अहमद, मानसी बागड़ी सहित कई लोग मौजूद रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation ओवरटेक की जल्दबाजी, हाईवे पर अफरातफरी, ट्रेलर पलटा, कार पुल के नीचे उतरी, बड़ा हादसा टला उदयपुर ने रखा प्रशासनिक गौरव—काल में कदम, नए कलेक्टर का सर्किट हाउस में स्वागत