24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। आसपुर मार्ग योगिन्द्र गिरी तलहट पर स्थित प्रभुदास रामद्वारा योगेन्द्र गिरी में दिव्य चातुर्मास के अंतर्गत रामकथा में रामस्नेही संप्रदाय मेडता के उत्तराधिकारी संत रामनिवास शास्त्री ने रामकथा अन्तर्गत रावण द्वारा जब विभीषण को त्याग किया रावण जब विभीषण त्यागा। सभी ने सोचा अब लंका का भविष्य अभागा है। विभीषण जब राम की शरण मे आया तब सुग्रीव और अन्य को नाना प्रकार के संदेह और शंका होने लगी। भगवान कहते है शरण मे आये हुए पर किसी संदेह और शंका करना सत्य नही है।
संत ने कहा शरणागत कहु जे तजहि निज अनहित अनुमानि।। शरणागत कोई भी आता है वो अपना कुछ बुरा नही कर सकता है। मानव को पदवी प्रदान की जाती है कि इंसान बनो अन्य किसी जीव को पदवी नही दी जाती है हाथी को नही कहा जाता कि हाथी बनो। किसी का विश्वास जितना हो तो अपनापन करना पडता है। जहाँ जैसी परिस्थिति हो चौपाई के शब्द का अर्थ उसी प्रकार हो जाता है जैसा उपयोग करना चौपाई की व्याख्यान उसकी गहराई पर पर निर्भर करता है। चाय मे मक्खी गिर जाए तो चाय का सेवन नही किया जाता है परन्तु शुद्ध घी मे छिपकली भी गिर जाए तो कंजूस उसका भी प्रयोग कर लेगा। बंजर भूमि मे कितने ही बीज बोए जाए तो कभी प्रस्फुटित नही होने वाले है । आजकल भगवान की अच्छी तस्वीर को घर मे रखी जाकर सजाया जाता है जबकि खराब होने पर मंदिर प्रांगण मे छोडक़र चले जाते है मंदिर की साज-सज्जा हमारा दायित्व है इस तरफ हमे पूर्ण सोचना जरूरी है। संत ने कहा ढोल गंवार शुद्र पशु नारी। सकल ताकना के अधिकारी।। तार्ण शब्द से ताडना बना जिसका अर्थ हिन्दी मे समझना और रक्षा करना है इसी समुद्र द्वारा पांच तत्वो का प्रयोग किया। ढोलक बजाना समझना आप जिसका उपयोग करना चाहते हो समझना आग के उपयोग का ज्ञान होना पशुपालन मे पशु को समझना और अन्तिम है नारी अर्थात धरनी पृथ्वी जिसे उपयोग करने समझना। समुद्र ने प्रसन्न होकर कई उपाय बताकर समुद्र लांघने का उपाय बताया।। समुद्र की सलाह भगवान को अच्छी लगी और उसका अनुकरण किया गया। भगवान के गुण को जो समझेंगे और गुण गान करेगे वह भवसागर तर जाते है। कथा के दौरान शास्त्री ने रामचरित मानस की चौपाई का गायन संगीतमय शैली मे किया गया। रंग मने राम नाम नो लाग्यो रे…..,मीठे रस भरयो राधारानी लागे.. सहित भजन प्रस्तृत किये। महाप्रसाद के यजमान सोहनदेवी-सत्यनारायण बांसवाड़ा महेन्द्र कुमार- शान्तिलाल सोमपुरा द्वारा विप्रवर विनोद त्रिवेदी के उपस्थिति मे मंत्रोच्चारण से पोथी- पूजन और आरती उतारी गई। कबीर पंथ की साध्वी भुवनेश्वरी, विशाखा दीदी,प्रभुदास धाम संत उदयराम व संत अमृतराम के सानिध्य पर लोकेश ठाकूर,कैलाश माकड,मंगेश भाटी,लालशंकर भावसार ने तबला,ऑर्गन व मंजीरे पर संगत दी। इस अवसर नरसिंग-नाथा पटेल गुजरात,जयन्तिलाल राठौर,प्रकाश भावसार- बांसवाडा,दिनेश शर्मा,राजेन्द्र शुक्ला,प्रसाद भावसार,धर्मीलाल कंसारा,हेमन्त शुक्ला,प्रभाशंकर फलोत कौशल्या -गोवर्धनलाल शर्मा,हेमन्त सोमपुरा,गिरीश भावसार,माधुरी,दीपिशा भावसार, मधुकान्ता आर्य, रुपनारायण भावसार,लोकेश सोमपुरा,बादल मकवाणा, सुखलाल रोत सहित नगर के कई समाजों के महिला पुरुष उपस्थित रहे।
शरण मे आये हुए पर किसी संदेह और शंका करना सत्य नही है-संत रामनिवास शास्त्री

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