24 News Update बालोद/बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में महिला आरक्षक से दुष्कर्म के आरोपी डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर उन्हें पद से हटाते हुए विभागीय जांच की प्रक्रिया प्रारंभ की है। पीड़िता द्वारा छह माह पूर्व दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद यह कार्रवाई हुई है।मामला डौंडी थाना क्षेत्र का है। महिला आरक्षक ने शिकायत में आरोप लगाया है कि वर्ष 2017 से दोनों के बीच संबंध थे और आरोपी ने शादी का झांसा देकर सात वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान वह तीन बार गर्भवती हुई और प्रत्येक बार कथित रूप से जबरन गर्भपात कराया गया।पीएससी चयन के बाद बदले हालातदिलीप उइके वर्ष 2020 में पीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर डिप्टी कलेक्टर बने और उनकी पदस्थापना बीजापुर में हुई। शिकायत के अनुसार, नौकरी मिलने के बाद विवाह के प्रश्न पर उन्होंने टालमटोल शुरू कर दी। पीड़िता का कहना है कि अगस्त 2017 में उसकी पुलिस विभाग में नियुक्ति हो गई थी। पढ़ाई के दौरान दोनों का परिचय हुआ, जो बाद में संबंध में बदल गया। युवती के अनुसार, उइके की पढ़ाई और कोचिंग के लिए वह हर माह 4-5 हजार रुपये भेजती रही। बाद में बैंक से ऋण लेकर करीब 3.30 लाख रुपये भी आरोपी के खाते में ट्रांसफर किए गए। कार खरीद और आर्थिक लेन-देन का आरोपशिकायत में यह भी उल्लेख है कि फरवरी 2023 में एक कार खरीदी गई, जिसे पहले युवती के नाम पर दर्ज कराया गया। बाद में लोन राशि स्थानांतरित कर वाहन को अपने नाम पर करवा लिया गया। 2024-25 में गर्भपात के आरोपमहिला आरक्षक के अनुसार, दिसंबर 2024 में आरोपी उसे अंडमान ले गया, जहां दोनों साथ रहे। जनवरी 2025 में गर्भवती होने पर बीजापुर बुलाकर कथित रूप से जबरन गर्भपात की दवा दी गई। मई 2025 में तीसरी बार गर्भधारण होने पर भी इसी प्रकार दवा देने का आरोप लगाया गया है। पीड़िता का आरोप है कि 2 जून 2025 को आरोपी ने विवाह से स्पष्ट इंकार कर दिया, जिसके बाद उसने डौंडी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। छह माह बाद कार्रवाई, RTI के बाद खुलासाएफआईआर दर्ज होने के बाद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगे जाने पर सामान्य प्रशासन विभाग से निलंबन की पुष्टि हुई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की विभागीय जांच जारी है और आपराधिक प्रकरण की विवेचना संबंधित पुलिस द्वारा की जा रही है। यह प्रकरण प्रशासनिक सेवा में आचरण और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही दोष सिद्ध या निराधार होने की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल आरोपी अधिकारी निलंबन अवधि में मुख्यालय से संबद्ध रहेंगे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सचिन पायलट के करीबी विनोद जाखड़ को NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया “FIR या फिल्मी स्क्रिप्ट?” — इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बखियां उधेड़ी पुलिस की, बोला—चेंज करो स्क्रिप्ट