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इतिहासकारों ने वडनगर व ईडर की ऐतिहासिक धरोहरों का किया अवलोकन

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24 News Update उदयपुर। ग्लोबल हिस्ट्री फोरम के तत्वावधान में इतिहासकारों के एक दल ने गुजरात के ऐतिहासिक एवं पौराणिक स्थलों का भ्रमण कर प्राचीन आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर महत्वपूर्ण अध्ययन किया। दल ने वडनगर पुरातात्विक अनुभवात्मक संग्रहालय सहित ऐतिहासिक ईडर क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहरों का अवलोकन किया।
फोरम के संस्थापक महासचिव डॉ अजात शत्रु सिंह शिवरती के नेतृत्व में गए दल में डॉ राजेंद्र नाथ पुरोहित, डॉ जे. के. ओझा, डॉ हरीश राव, डॉ रामसिंह राठौड़, डॉ सुरेन्द्र चौहान एवं शोधार्थी पीनल जैन शामिल रहे।
इतिहासकारों ने अध्ययन के आधार पर मेवाड़ के गुहिल शासक शिलादित्य के काल (विक्रम संवत 703/646 ई.) के सम्भोली ग्राम शिलालेख का उल्लेख करते हुए मेवाड़ की समृद्ध आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डाला। शिलालेख, जिसे पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा संरक्षित किया गया, में “वटनगर” से आए महाजनों का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने अरण्यगिरी में अरण्यवासिनी देवी का मंदिर बनवाया।
इतिहासकारों ने बताया कि पूर्व में “वटनगर” को सिरोही राज्य के बसंतगढ़ से जोड़ा गया था, किंतु गुजरात स्थित प्राचीन वडनगर (बड़नगर) के उत्खनन एवं संग्रहालय के अवलोकन के पश्चात यह संभावना प्रबल हुई है कि शिलालेख में उल्लिखित “वटनगर” वर्तमान वडनगर ही रहा होगा। तुलनात्मक अध्ययन में वडनगर को अत्यंत विकसित एवं समृद्ध व्यापारिक केंद्र पाया गया, जहां के महाजनों के मेवाड़ के जावर क्षेत्र से घनिष्ठ व्यापारिक संबंध रहे होंगे।
इतिहासकारों ने डॉ गोपीनाथ शर्मा के मत का भी उल्लेख किया, जिसमें जावर क्षेत्र को प्राचीन काल में तांबा-जस्ता खनन का प्रमुख केंद्र बताया गया है, जहां देश-विदेश के व्यापारी आते थे। यात्रा के दौरान दल ने नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित वडनगर क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं का अवलोकन किया तथा ऐतिहासिक ईडर में पूर्व राजपरिवार के सदस्य महाराज जयदीप सिंह एवं महाराज करनी सिंह से भेंट की। संग्रहालय से संबंधित अधिकारियों से भी विस्तृत चर्चा की गई।

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