24 न्यूज अपडेट, सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर रोड स्थित श्रीप्रभुदास धाम रामद्वारा में चातुर्मास के तहत रामकथा में मेडता उत्तराधिकारी संत श्रीरामनिवास शास्त्री महाराज ने कहा कि परमात्मा का परिचय नहीं दिया जा सकता, केवल संकेत किया जा सकता है। परिचय तो संसार का दिया जाता है, भगवान का दर्शन सौभाग्य से ही होता है।
संत ने राम वनवास प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आगे-आगे रामजी, पीछे लक्ष्मणजी और बीच में सीताजी चलते हैं, मानो ब्रह्म और जीव के बीच माया चल रही हो। गीता में भगवान ने कहा है कि “मैं मनुष्य के हृदय में रहता हूँ।” माया का पर्दा हटाकर ही भक्ति से कल्याण संभव है।
कथा के दौरान भजनों के माध्यम से संत ने बताया कि भगवान के दर्शन के लिए चकोर जैसे नेत्र चाहिए। भगवान को भोग लगाकर ही भोजन करना चाहिए, वे भाव के भूखे हैं। संत उदयराम महाराज एवं संत अमृतराम महाराज के सानिध्य में पंडित विनोद त्रिवेदी के मंत्रोच्चारण से जयंत भावसार परिवार द्वारा व्यासपीठ एवं पोथी पूजन किया गया। इस अवसर पर अनेक भक्त उपस्थित रहे।
परमात्मा का परिचय नहीं दिया जा सकता, केवल संकेत किया जाता है – संत शास्त्री

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