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खेमली पंचायत समिति का दर्जा समाप्त करने पर उबाल: कस्बा पूरी तरह बंद, घासा को नया पंस. बनाने पर ग्रामीणों का विरोध तेज

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24 News Update उदयपुर। पंचायतीराज विभाग की नई अधिसूचना में खेमली पंचायत समिति को समाप्त कर उसकी जगह घासा को पंचायत समिति का दर्जा देने के विरोध में मंगलवार को खेमली कस्बा पूरी तरह बंद रहा। सुबह से ही बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और मेडिकल जैसी आवश्यक सेवाओं की दुकानें भी बंद रहीं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने धरना देकर सरकार के फैसले पर कड़ा आक्रोश जताया।
भीड़ ने चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी के खिलाफ नारेबाजी की और उनका पुतला भी खड़ा किया। ग्रामीणों का कहना था कि कांग्रेस सरकार के समय खेमली को पंचायत समिति बनाया गया था, कार्यालय भी शुरू हो चुका था, लेकिन मौजूदा सरकार ने अचानक पुनर्गठन में खेमली की जगह घासा को पंचायत समिति घोषित कर दिया।
ग्रामीणों के अनुसार घासा पंचायत समिति में 26 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है, जिनमें नुरड़ा, पलाना खुर्द, विरधोलिया, तुलसीदास की सराय, नांदवेल, गुड़ली, धुणीमाता, सिंदू, रख्यावल, रठाना, मंडी की मगरी, मोतीखेड़ा जैसी पंचायतें भी शामिल की गई हैं। इस पुनर्गठन से खेमली पंचायत केवल एक पंचायत बनकर रह जाएगी और घासा के अधीन चली जाएगी।
धुणीमाता ग्राम पंचायत से पहुंचे नानालाल नागदा ने कहा कि यदि सरकार को घासा को पंचायत समिति बनाना ही था, तो नई समिति बनाती। खेमली के पहले से अस्तित्व में आ चुके पंस. कार्यालय को हटाने का कोई औचित्य नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान खेमली से घासा रोड पर टायर जलाकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई घंटों तक आवागमन ठप रहा।
इस बीच डबोक थानाधिकारी हुकुम सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने भीड़ को समझाते हुए कहा— “अपनी मांगें ज्ञापन के माध्यम से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाएं, लेकिन आम जनता को परेशान करने वाला रास्ता अवरोध उचित नहीं है।”
पुलिस ने पुतले हटाए और भीड़ को किनारे करके आवागमन बहाल करवाया। ग्रामीणों का कहना है कि खेमली की पंचायत समिति पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की घोषणा के बाद बनी थी, जिसका संचालन वर्तमान भवन में चल भी रहा था। अब अचानक उसका दर्जा समाप्त करना स्थानीय लोगों के साथ अन्याय है।
कस्बे में पूरे दिन बंद का व्यापक असर देखने को मिला और लोगों ने सरकार से पुनर्गठन में की गई “गलती” सुधारने की मांग की।

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