रिपोर्ट- राहुल पाटीदार कानोड़
24 News Update कानोड़. अफीम की फसल प्रवान पर कस्बे के सहित आसपास के गांव मैं काले सोने के नाम से मशहूर अफीम की फसल इन दोनों प्रवान पर है किसानों ने शुभ मुहूर्त मैं माताजी की पूजन के बाद किसानों ने चीरा लगाने व लुगाई का कार्य प्रारंभ कर दिया है कुछ किसानों ने लुगाई के कार्य में देरी बनी हुई थी। कस्बे सहित पीथलपुरा बड़ा राजपुरा नया राजपुरा शिवपुरा सरवानिया खेता खेड़ा आदि गांव में पट्टा धारी किसान अफीम की खेती करते हैं किसान अफीम की सुरक्षा के लिए किसान दिन रात खेतों पर ही निगरानी करते हैं वही अफीम की सुरक्षा के लिए किसानों ने सीसीटीवी कैमरे जाली वह अफीम की सुरक्षा के लिए कड़ी मेहनत करते हैं अनुज्ञापत्र मिलने के बाद अनूमन 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक इसकी बुवाई की जाती है वहीं इस बार बारिश की वजह से कई किसानों ने वापस अफीम की बुवाई की थी इसके कारण कई जगह पर देरी बनी हुई है वहीं कहीं जगह पर डोडों से दूध निकालना शुरू हो गया है जनवरी के अंत व फरवरी के शुरुआत में फसल पूर्ण यौवन पर रहती है सफेद फूलों के बाद डोड़ियों से पौधे लद जाते हैं। फरवरी के द्वितीय सप्ताह से लेकर मार्च प्रथम दूसरे सप्ताह तक इसमें चीरा लगाने का काम शुरू हो जाता है डोडे में लगे चीरे से जो दूध निकलता है वही अफीम कहलाता है बुवाई होने के बाद से चीरा लगने एवं तुलाई नहीं होने तक किसानों की कड़ी मेहनत होती है डोडें तैयार होने के बाद विशेष औजार के द्वारा इसको चीरा लगाकर उसे निकालने वाले दूध को भी विशेष तरीके से एकत्रित किया जाता है वही एकत्रित दूध काला सोना अफीम कहलाती है जो की एक निर्धारित मात्रा में इकटी कर नारकोटिक्स विभाग को तुलवाई जाती है।
अफीम फसल है बहुमूल्य और रुतबा वाली
अफीम वर्तमान समय में क्षेत्र के किसानों के लिए बहुमूल्य फसल है जो अच्छी आमदनी के साथ समाज में रुतबा भी दिलाता है अफीम काश्तकार अफीम की खेती को बच्चों की तरफ पाल पोषण कर बड़ा करते हैं जिस दिन से फसल बोई जाती है और जहां तक कटती हैं तब तक किसान उसकी पल-पल निगरानी करते हैं यही नहीं इसकी निगरानी के लिए किसान खेतों पर कच्चा मकान तैयार कर वहीं अफीम की सुरक्षा में रहते हैं लिहाजा किसानों को इसकी सुरक्षा ज्यादा करनी पड़ती है कहीं बार किसानों के खेतों से अफीम के पौधों से डोडे तोड़ कर ले जाते हैं इसकी सुरक्षा के लिए अफीम किसान दिन रात खेतों पर ही गुजरते हैं।
अफीम से जुड़े रोचक तथ्य
अफीम एक पौधा होता है इस पौधे में डोडा लगता है और डोडे में चेहरा लगाते हैं और इससे दूध निकलता है फिर उसे दूध को सुखाते हैं फिर अफीम बनती है और इसको राजस्थानी भाषा में अमल के नाम से भी मशहूर है और इसको नारकोटिक्स विभाग किसानों से खरीदता है और इसका उपयोग दवाइयां में किया जाता है अफीम फसल की खेती करने के लिए सरकार निर्धारित आरी मतलब क्षेत्रफल पर पट्टे देते है इसकी उपज भी निर्धारित होती है वह कई बार कम उपज होने पर किसान के पट्टे भी कट जाते हैं

