24 न्यूज अपडेट, सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर मार्ग लोहारिया तालाब के सामने स्थित कान्हडदास धाम बड़ा रामद्वारा में चातुर्मास में रामस्नेही संत तिलक रामजी ने मंगलवार को सत्संग में कहा कि संसार में राग-द्वेष व मोह के कारण मानव अपने वास्तविक स्वरूप को भूल गए।
संत ने कहा मनुष्य तुम स्वयं में अनंत शक्ति और ज्ञान का भंडार हो लेकिन इस संसार में राग- द्वेष और मोह के कारण अपने वास्तविक स्वरूप को भूल गए जब तक आत्मा स्वयं को पहचान नहीं लेती, तब तक यह संसार जन्म- मृत्यु के चक्र में फंसा रहता है। आत्मा का लक्ष्य केवल संसार से मुक्ति प्राप्त करना नहीं है बल्कि अपनी शुद्ध अवस्था में स्थित होना है संत ने कहा कि मोक्ष का साधन केवल आत्म ज्ञान है कर्म नहीं यद्यपि प्रारंभिक साधना में कर्म उपयोगी हो सकते हैं परंतु वे केवल चित्तशुद्धि के निमित्त हैं। संत ने कहा मोक्ष, केवल ब्रह्मविद्या द्वारा ही संभव है कर्म बहिर्मुखी है ,ज्ञान अंतर्मुखी कर्म स्वर्ग का मार्ग है ,ज्ञान मोक्ष का द्वार कर्मों से गति, पर ज्ञान से मुक्ति। जब जीवन सांसारिक माया-जाल में भटककर थक जाता है- पद, प्रतिष्ठा, पुण्य और स्वर्ग की क्षणभंगुर सिदॄयिं के पीछे दौड़ते -दौड़ते भी हृदय में एक अटल शून्यता रह जाती है तब एक मौन प्रश्न जागता है संत भजन के माध्यम से कहा क्या बस यही जीवन का सार है तब यह वह क्षण है, जब विवेक का प्रभात होता है कोयल बोले मीठी- मीठी वाणी भजन से भक्त झूम उठे। प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा ने बताया कि संध्याकालीन आरती का आयोजन शाम 7ः15 बजे होता है। इस अवसर पर समिमि अध्यक्ष सुधीर वाडेल, नाथू परमार, विजय पंचाल ,विष्णु भासारिया,महिला मंडल से संगीता सोनी, शकुंतला भावसार ,अनीता सुथार, लक्ष्मी पंचाल, प्रेमलता सुथार एवं अन्य महिला भक्त उपस्थित थे। संत प्रसाद नाथूलाल परमार परिवार का एवं सत्संग प्रसाद अध्यक्ष सुधीर वाडेल का रहा।
संसार में राग-द्वेष व मोह के कारण मानव अपने वास्तविक स्वरूप को भूल गए- संत तिलकराम महाराज

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