उदयपुर। मात्स्यकी महाविद्यालय एवं राजफिशरीज ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को डॉ. मधुसूदन शर्मा को भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि सभा में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, अधिकारियों तथा विद्यार्थियों ने उन्हें स्मरण करते हुए उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान को याद किया।
कार्यक्रम में मात्स्यकी महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता एवं राजफिशरीज ग्रुप के संयोजक डॉ. एल.एल. शर्मा ने कहा कि डॉ. शर्मा का आकस्मिक निधन अत्यंत दुखद एवं स्तब्ध करने वाला है। वे सौम्य, विनम्र और सदैव प्रसन्नचित्त व्यक्तित्व के धनी थे। उनका व्यवहार सहयोगात्मक एवं प्रेरणादायी रहा और वे हर समय मार्गदर्शन के लिए तत्पर रहते थे।
राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एम.के. महला ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए बताया कि डॉ. शर्मा सुखाड़िया विश्वविद्यालय में विज्ञान संकाय के डीन और जूलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष रहे। इसके साथ ही वे सेंट्रल लाइब्रेरी के ऑफिस इंचार्ज तथा स्पोर्ट्स बोर्ड के चेयरमैन भी रहे। उन्होंने मात्स्यकी महाविद्यालय में गेस्ट फैकल्टी के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
पूर्व अधिष्ठाता डॉ. बी.के. शर्मा ने कहा कि सरोवर विज्ञान, मत्स्य विज्ञान एवं पर्यावरण शिक्षा-अनुसंधान के क्षेत्र में उनका योगदान अमूल्य है। शांतिपीठ के अध्यक्ष अनंत गणेश त्रिवेदी ने कहा कि उनका असामयिक निधन उदयपुर सहित पर्यावरण शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
डॉ. एच.के. वर्डिया, डॉ. शाहिदा जयपुरी, सहायक मत्स्य अधिकारी शीतल नरूका, डॉ. एम.एल. ओझा, डॉ. सुबोध शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका शोध कार्य और सरल व्यक्तित्व सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
सभा में मोहनलाल पालीवाल (सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी), डॉ. बी.एस. चावड़ा (पूर्व संयुक्त निदेशक, मत्स्य विभाग), अरुण पुरोहित (पूर्व उपनिदेशक), डॉ. कमल सिंह राठौड़, डॉ. एन.एस. सोलंकी, डॉ. दर्शना दवे, डॉ. नितेश, डॉ. रोहिताश सहित महाविद्यालय के सह-शैक्षणिक कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुबोध शर्मा ने किया।
कई राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत थे
डॉ. मधुसूदन शर्मा वर्ष 2011 से 2014 तक कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति रहे और शैक्षणिक विकास को नई दिशा दी। वे 10 वर्ष तक प्रोफेसर रहे तथा 21 पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्हें एमिनेंट साइंटिस्ट अवार्ड और नेशनल फेलोशिप अवार्ड सहित कई राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। पर्यावरण शिक्षा एवं जन-जागरूकता के क्षेत्र में उनके योगदान को व्यापक सराहना मिली।
श्रद्धांजलि सभा में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

