24 News Update तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग के 29वें दिन वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्री 30 मार्च को पाकिस्तान पहुंचेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात करेंगे।
इस बैठक को जंग शुरू होने के बाद पहली बड़ी बहुपक्षीय पहल माना जा रहा है, जिसमें मिडिल ईस्ट के हालात पर व्यापक चर्चा होगी। पहले यह बैठक तुर्किये में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे पाकिस्तान शिफ्ट किया गया।
पाकिस्तान क्यों बना बैठक का केंद्र?
विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान के ईरान और सऊदी अरब दोनों से संतुलित संबंध हैं, जिससे वह एक न्यूट्रल प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है। इसके अलावा तुर्किये और मिस्र के साथ भी उसके संबंध स्थिर माने जाते हैं, जिससे वार्ता को आगे बढ़ाने में सहूलियत मिल सकती है। दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात के भी अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर इस संघर्ष में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले तीन हफ्तों में ईरान ने यूएई पर 2200 से अधिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें अधिकांश को एयर डिफेंस सिस्टम ने निष्क्रिय कर दिया।
जंग के ताजा घटनाक्रम
ईरान ने दक्षिणी फार्स प्रांत में 120 क्लस्टर बम निष्क्रिय करने का दावा किया।
इजराइल ने ईरान के अराक स्थित हेवी वॉटर न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स सहित कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। वेस्ट बैंक में हिंसा बढ़ने से पिछले एक महीने में 9 लोगों की मौत और सैकड़ों हमलों की घटनाएं सामने आईं। यमन में हूती लड़ाकों पर सरकार ने देश को युद्ध में धकेलने का आरोप लगाया। इस बीच भारत भी कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोम्मद बिन सलमान से बातचीत कर क्षेत्रीय हालात और ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता जताई। मिडिल ईस्ट में लगातार बदलते हालातों के बीच यह साफ है कि अब जंग सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रही, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी नए समीकरण तेजी से बन रहे हैं।

