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प्रेम विवाह, कम उम्र और असमर्थ पालन-पोषण के बावजूद ‘एंजेल’ ने अम्मा कार्यक्रम से पाई नई जिंदगी

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24न्यूज़ अपडेट डूंगरपुर। डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा ब्लॉक में बच्ची ‘एंजेल’ आज अपने जीवन में नई ऊर्जा और स्वस्थ भविष्य की ओर अग्रसर हो रही है। यह कहानी नवविवाहित जोड़े प्रिया और संदीप की है, जिन्होंने समाज से अलग प्रेम विवाह किया और परिवार से अलग रह रहे थे। विवाह के समय प्रिया 18 वर्ष और संदीप 21 वर्ष के थे। परिवारों की रजामंदी के बिना की गई शादी की जानकारी घरवालों को गर्भावस्था के सातवें महीने में दी गई, जिसके बाद समाजिक स्वीकृति मिली और उन्हें पुनः विधिवत विवाह कर घर लाया गया।
21 नवंबर 2023 को जन्मी एंजेल का जन्म वजन 2.1 किलोग्राम था, जो कि बेहद कम था। गर्भावस्था के दौरान सही देखभाल न होने के कारण बच्ची कुपोषण की शिकार हो गई। 6 महीने की उम्र में जब वजन नहीं बढ़ा, तो उसे अम्मा कार्यक्रम में शामिल किया गया।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मंजुला यादव की औरसे MCHN दिवस पर स्क्रीनिंग में एंजेल को अतिकुपोषित पाया गया। वजन 5.5 किलोग्राम और लंबाई 67.5 सेमी पाई गई। चिकित्सा परीक्षण और भूख परीक्षण के बाद एंजेल को अम्मा कार्यक्रम में पंजीकृत किया गया। जांच में पता चला कि बच्ची को नियमित भोजन नहीं दिया जा रहा था, और उसकी पसंद को ध्यान में नहीं रखा जा रहा था।
कार्यकर्ता द्वारा एंजेल की माँ और दादी को पोषण से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई – जैसे कि भोजन की मात्रा, बारंबारता, बर्तन की माप, और निगरानी प्रपत्र की उपयोगिता। साथ ही उन्हें बताया गया कि चार महीनों तक बच्ची की निगरानी की जाएगी और हर महीने चार बार घर पर संपर्क किया जाएगा।
कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनी ने घरेलू आहार में घी, गुड़, तेल, और शक्कर जैसे ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करने की सलाह दी। “आहार कैलेंडर” रसोई में लगाया गया ताकि अलग-अलग रेसिपी के माध्यम से बच्ची को आकर्षक भोजन दिया जा सके। कार्यकर्ता ने घर पर जाकर खाना बनाकर भी दिखाया और दादी को निगरानी प्रपत्र भरने की ट्रेनिंग दी।
लगातार प्रयासों से एंजेल की सेहत में सुधार आया, उसका वजन नियमित रूप से बढ़ा और अब वह स्वस्थ, सक्रिय और प्रसन्नचित्त है। एंजेल की दादी हँसते हुए बताती हैं, “यह बहुत शरारती हो गई है, अब तो चलना सीख गई है, बोलती है, खेलती है और सबके साथ खुश रहती है।”
यह कहानी बताती है कि कैसे समुदाय, समर्पित कार्यकर्ता और सरकारी योजनाएं मिलकर एक नवजात को नई जिंदगी दे सकती हैं।

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