24 News Update उदयपुर। केन्द्र सरकार द्वारा संसद में पारित सस्टेनेबल हार्नेस्टिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांस्फॉर्मिंग इंडिया (शांति) कानून को लेकर माकपा ने कड़ा विरोध जताया है। माकपा जिला सचिव एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने आरोप लगाया कि यह कानून अदाणी को नया मुनाफे का धंधा सौंपने और निजी हाथों में परमाणु ऊर्जा देने की साजिश है, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
सिंघवी ने कहा कि इस कानून के जरिए निजी कंपनियों को न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण, संचालन और डी-कमीशनिंग की अनुमति दी जा रही है। इससे परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निजी मुनाफाखोरी का रास्ता खुल गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कानून में परमाणु दुर्घटना की स्थिति में कंपनियों की मुआवजा जिम्मेदारी सीमित कर दी गई है। यदि कोई विदेशी कंपनी प्लांट बनाकर उसे अदाणी जैसे निजी ऑपरेटर को सौंपती है, तो भविष्य में किसी दुर्घटना पर उस विदेशी कंपनी की कोई जवाबदेही नहीं रहेगी। राजेश सिंघवी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु लॉबी लंबे समय से नागरिक परमाणु दायित्व अधिनियम 2010 में संशोधन के लिए भारत पर दबाव बना रही थी। शांति कानून के जरिए ऑपरेटर को उपकरण सप्लायर से मुआवजा वसूलने का अधिकार खत्म कर दिया गया है, जो देशहित के खिलाफ है।
उन्होंने भाजपा पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि 2006 में यूपीए सरकार के समय भाजपा ने इसी तरह के कानून का विरोध किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही फैसले लागू किए जा रहे हैं। सिंघवी ने चेतावनी दी कि यह कानून देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरा है और इससे भविष्य में अशांति की स्थिति बन सकती है। माकपा जिला सचिव ने आम जनता से शांति कानून के खिलाफ आवाज उठाने और इसका विरोध करने की अपील की है।
शांति कानून पर माकपा का हमला, अदाणी को परमाणु क्षेत्र सौंपने का आरोप

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