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उदयपुर के कर्नल आदित्य जोशी को विशिष्ट सेवा मेडल राष्ट्र ने चिकित्सा सेवा और सैन्य समर्पण को दिया सम्मान

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24 News Update उदयपुर। 77वें गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर उदयपुर के गौरव, कर्नल आदित्य जोशी (आर्मी मेडिकल कोर) को विशिष्ट सेवा मेडल (वी.एस.एम.) प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें जून माह में राष्ट्र एवं सशस्त्र सेना बलों के प्रति उनकी उत्कृष्ट, समर्पित और अनुकरणीय चिकित्सा सेवा के लिए प्रदान किया जाएगा।

आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज, पुणे से वर्ष 2001 में चिकित्सा स्नातक, 2009 में एनेस्थेसिया में स्नातकोत्तर तथा 2019 में मेदांता से गहन चिकित्सा (क्रिटिकल केयर) में पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप प्राप्त करने वाले कर्नल जोशी, गहन चिकित्सा के क्षेत्र में अपने गहरे ज्ञान, स्थिर स्वभाव और समर्पित उपचार पद्धति के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं।

कोविड-19 महामारी के चुनौतीपूर्ण दौर में उन्होंने अथक परिश्रम करते हुए दिन-रात सेवा दी और अनेक गंभीर रोगियों का जीवन बचाया। विशेष रूप से एक्स्ट्रा कॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ईसीएमओ) तकनीक के माध्यम से अत्यंत जटिल मामलों में रोगियों को नया जीवन देने में उनकी विशेषज्ञता उल्लेखनीय रही है। कोविड काल तथा उसके पश्चात इस क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें आर्मी कमांडर (पूर्वी कमान) एवं सेना अध्यक्ष (सीओएएस) से प्रशंसा पत्र एवं मेडेलियन से सम्मानित किया जा चुका है।

वर्तमान में कर्नल आदित्य जोशी सशस्त्र बलों के सर्वाधिक प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान “आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल)” में गहन चिकित्सा विभागाध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

अपने 25 वर्षों के गौरवपूर्ण सैन्य सेवा काल में उन्होंने सियाचिन, जम्मू-कश्मीर, असम, पश्चिम बंगाल, राजस्थान सहित अनेक संवेदनशील क्षेत्रों तथा संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (लेबनान) में भी चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर राष्ट्र और सेना के प्रति अपने समर्पण का परिचय दिया है।

द्वितीय पीढ़ी के सैन्य अधिकारी कर्नल आदित्य जोशी, सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर (डॉ.) सी. पी. जोशी (ए.एम.सी.) के सुपुत्र हैं। राष्ट्र एवं सशस्त्र बलों के प्रति प्रेम और सेवा-भाव उन्हें विरासत में प्राप्त हुआ है।

इस सम्मान की प्राप्ति का प्रथम श्रेय कर्नल जोशी अपनी जीवनसंगिनी श्रीमती अमृता जोशी को देते हैं, जिन्होंने उनके 12 से 18 घंटे तक चलने वाले कर्तव्य काल के दौरान परिवार को सुदृढ़ रूप से संभालते हुए हर कदम पर उनका साथ निभाया।

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