24 न्यूज अपउेट, नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के सेरी बागना में रविवार सुबह बादल फटने से बाढ़ और भूस्खलन ने भयंकर तबाही मचाई। अब तक 3 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई घर, होटल और गाड़ियां मलबे में दब गए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन खराब मौसम चुनौतियां बढ़ा रहा है। बार-बार होने वाली ऐसी आपदाएं क्षेत्र की कमजोरियों और अपर्याप्त आपदा प्रबंधन को उजागर करती हैं।
आपदा का विवरण
सेरी बागना में बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई, जिसने पहाड़ों से मलबा गांवों तक पहुंचा दिया। स्थानीय खबरों के मुताबिक, कई घर मलबे में दब गए और लोग फंस गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पहाड़ों से गिरता मलबा और उसमें दबी गाड़ियां, जिनमें 3-4 टैंकर शामिल हैं, दिख रही हैं। होटल और रिहायशी इलाके भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (छक्त्थ्) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन बारिश और मलबा रास्ते में बाधा बन रहे हैं।
रामबन के बनिहाल इलाके में कई जगह भूस्खलन होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे, जो कश्मीर घाटी को देश से जोड़ता है, मलबे की वजह से बंद कर दिया गया। सैकड़ों वाहन, जिनमें ट्रक और यात्री बसें शामिल हैं, फंसे हुए हैं। किश्तवाड़-पद्दर मार्ग भी बंद है। अधिकारियों ने मौसम साफ होने तक हाईवे पर यात्रा न करने की अपील की है। हाईवे का बार-बार बंद होना एक पुरानी समस्या है, जो वैकल्पिक मार्गों और बेहतर रखरखाव की जरूरत को दर्शाता है। प्रभावित इलाकों के वीडियो दिल दहला देने वाले हैं। एक वीडियो में बनिहाल का एक गांव पूरी तरह मलबे में दबा दिख रहा है, जहां घर मिट्टी में मिल गए। दूसरे वीडियो में पहाड़ का एक हिस्सा ढहते हुए हाईवे पर मलबा गिरता दिख रहा है, जिसमें गाड़ियां दब गईं। स्थानीय लोगों ने इसे “प्रलयकारी“ बताया है। बचाव कार्यों के दौरान और लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने का डर है।
बारिश और क्षेत्रीय प्रभाव
जम्मू-कश्मीर में कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे मिट्टी कमजोर हो गई और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया। भारतीय मौसम विभाग (प्डक्) ने राज्य के कुछ हिस्सों में और बारिश की चेतावनी दी है। हाईवे बंद होने से कश्मीर घाटी में खाद्य सामग्री और ईंधन जैसी जरूरी चीजों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। रामबन जैसे पहाड़ी इलाकों में जंगलों की कटाई और अवैध निर्माण ने आपदाओं के प्रभाव को और बढ़ा दिया है। शुरुआती चेतावनी प्रणाली और मजबूत बुनियादी ढांचे की कमी भी इस तबाही को रोकने में नाकाम रही।
देश में मौसम का हाल
जबकि जम्मू-कश्मीर बारिश और बाढ़ से जूझ रहा है, देश के अन्य हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग हैः
राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्रः गर्म और शुष्क मौसम, तापमान 38-42 डिग्री सेल्सियस। मध्य प्रदेश के 5 जिलों में लू का अलर्ट। गुजरात में तेज गर्मी का असर।
दिल्ली-छब्त्, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेशः शुष्क और गर्म, तापमान 39-42 डिग्री। दिल्ली में न्यूनतम तापमान 20-23 डिग्री रहने की संभावना।
बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेशः बारिश और बिजली गिरने की आशंका। लोगों को सतर्क रहने की सलाह।
केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेशः तटीय इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ का खतरा। रामबन में बादल फटने से हुई तबाही ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया। यह घटना जलवायु परिवर्तन से बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता को दर्शाती है। बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं क्षेत्र में अपर्याप्त आपदा प्रबंधन, कमजोर बुनियादी ढांचे और पर्यावरणीय क्षरण को उजागर करती हैं। जम्मू-श्रीनगर हाईवे की बार-बार होने वाली रुकावट आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करती है, जिससे वैकल्पिक मार्गों की मांग बढ़ रही है। सरकार को शुरुआती चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, अवैध निर्माण पर रोक लगाने और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने की जरूरत है। यह आपदा न केवल स्थानीय समुदायों के लिए त्रासदी है, बल्कि देश भर में बढ़ते मौसमी खतरों की चेतावनी भी है।
जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से तबाहीः 3 की मौत, श्रीनगर हाईवे बंद

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