उदयपुर, 30 नवम्बर। माछला मंगरा स्थित शिराली भवन में आयोजित सीटू (CITU) के 13वें जिला सम्मेलन में मजदूरों के हक़, श्रम कानूनों के क्षरण और संगठित आंदोलन की मजबूत आवश्यकता पर जोर दिया गया। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सीटू के राज्य सचिव बी.एस. राणा ने साफ कहा कि “मजदूरों का राज कायम किए बिना मजदूरों के जीवन में बुनियादी परिवर्तन संभव नहीं।”
🔴 “मजदूरों को धर्म–जाति में बांटा जा रहा है, लेकिन मजदूर बंटेगा नहीं” — बी.एस. राणा
राणा ने कहा कि देश का निर्माण मजदूर करता है, लेकिन सरकारों ने हमेशा उसका शोषण किया है। मजदूरों के संघर्ष और कुर्बानियों से बने श्रम कानूनों को केंद्र सरकार ने “मुक्त व्यापार” के नाम पर समाप्त कर दिया, जो पूरी तरह पूंजीपतियों के हित में है।
उन्होंने कहा कि—
- केंद्र और राज्य सरकार की अधिकांश मजदूर-कल्याण योजनाएं भ्रष्टाचार में फंसकर आम मजदूर तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
- बिना संगठन के मजदूर अपने अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ सकता।
- श्रम कानूनों में बदलाव कर सरकार संविधान को कमजोर करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
- “अगर आर-पार की लड़ाई नहीं लड़ी, तो हम फिर गुलाम बन जाएंगे।”
🔴 मुख्य वक्ता भंवर सिंह शेखावत: “पीड़ित जनता आज भी लाल झंडे को उम्मीद के रूप में देखती है”
सीटू के राज्य अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि कमजोरियों के बावजूद आम आदमी, पीड़ित-वर्ग और मजदूर लाल झंडे को न्याय की एकमात्र उम्मीद मानता है। उन्होंने कहा—
- “लाल झंडे का एक सिपाही, एक हजार के बराबर होता है।”
- सरकार, प्रशासन और पुलिस लाल झंडे की ताकत नहीं चाहते, क्योंकि वे भ्रष्ट व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं।
- उद्योगपतियों व नेताओं के गठजोड़ पर निशाना साधते हुए कहा कि अधिकारी भी उसी व्यवस्था को मजबूत करने में लगे हैं।
- राजस्थान में न्यूनतम वेतन ₹7,500 और दिल्ली में ₹24,000 होने पर प्रश्न उठाया—“एक ही देश में यह कैसा फर्क?”
- देश की GDP में मेहनतकश 97% योगदान देते हैं, लेकिन उन्हें मिलता केवल 3%—“ क्या यह न्याय है?”
उन्होंने कहा कि सीटू मधुमक्खी के छत्ते की तरह है—“जो हमें छेड़ेगा, उसे छोड़ेंगे नहीं।”
शेखावत ने भगत सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि आज लाल झंडे वाले भी कुछ दलों की नजर में ‘देशद्रोही’ कहलाते हैं, लेकिन इतिहास तय करेगा कि असली देशभक्त कौन था।
🔴 ध्वजारोहण, शहादत स्मरण और रिपोर्ट पेश
सम्मेलन की शुरुआत वरिष्ठ मजदूर नेता हीरालाल सालवी के ध्वजारोहण से हुई। प्रतिनिधियों ने संघर्ष में शहीद हुए मजदूर नेताओं को श्रद्धांजलि दी।
सम्मेलन की अध्यक्षता राव गुमान सिंह ने की।
पिछले तीन वर्षों की गतिविधियों, संघर्षों और संगठनात्मक रिपोर्ट को जिला अध्यक्ष राजेश सिंघवी ने प्रस्तुत किया।
🔴 विभिन्न नेताओं ने रखे विचार
सम्मेलन में हरलाल लखारा, शमशेर खान, मोहम्मद निजाम, शाहिद मोहम्मद, राजेंद्र वसीटा, फिरोज अहमद, हीरालाल माली, रानू सालवी, गोपाल जायसवाल, मन्नालाल मसार और लोकेश गुर्जर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
🔴 21 सदस्यीय नई जिला कमेटी का गठन
सम्मेलन के अंत में नई 21 सदस्यीय कमेटी का गठन हुआ—
मुख्य पदाधिकारी
- संयोजक: राजेश सिंघवी
- सह–संयोजक: हीरालाल सालवी
- कोषाध्यक्ष: राव गुमान सिंह
सदस्यगण
हरलाल लखारा, शमशेर खान, मोहम्मद निजाम, शाहिद मोहम्मद, राजेंद्र वसीटा, फिरोज अहमद, जावेद खान, हीरालाल माली, विजय कुमार वर्मा, रानू सालवी, गोपाल जायसवाल, मन्नालाल मसार, लोकेश गुर्जर, याकूब मोहम्मद, कमलेश पालीवाल।
सम्मेलन में संगठन को मजबूत बनाने के महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

