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उदयपुर में नहीं खुलेगी सेंट्रल युनिवर्सिटी, सरकार ने किया मना, आदिवासी शिक्षा और विकास की अनदेखी?

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24 News update नई दिल्ली. लोकसभा में उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने दक्षिण राजस्थान, विशेष रूप से उदयपुर में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग को प्रमुखता से उठाया। शिक्षा मंत्री को संबोधित अपने प्रश्न में उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या दक्षिण राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्र में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की कोई योजना है। 

सरकार का उत्तर: उदयपुर के लिए कोई प्रस्ताव नहीं

शिक्षा मंत्रालय के राज्यमंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि भारत में वर्तमान में 48 केंद्रीय विश्वविद्यालय कार्यरत हैं। राजस्थान में पहले से ही एक “राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय” स्थापित है, जो राज्य में उच्च शिक्षा के लिए कार्य कर रहा है। मंत्रालय का कहना है कि इस समय दक्षिण राजस्थान में कोई नया केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए मौजूदा संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और शिक्षा प्रणाली को समेकित करने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

डॉ. मन्नालाल रावत द्वारा उठाए गए इस प्रश्न ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा कर दिया है। यदि मध्य प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में आदिवासी विश्वविद्यालय बनाए जा सकते हैं, तो फिर उदयपुर को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है?

राज्यों में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थिति

भारत में कुल 48 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख राज्यों में इनकी संख्या इस प्रकार है:

आदिवासी बहुल क्षेत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय क्यों जरूरी?

1. शैक्षणिक असमानता:

2. आदिवासी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की चुनौती:

3. जनजातीय विश्वविद्यालयों का उदाहरण:

4. क्षेत्रीय विकास और रोजगार:

राजनीतिक और सामाजिक बहस

लोकसभा में उठाए गए इस प्रश्न के बाद शिक्षा जगत और राजनीतिक गलियारों में इस पर बहस तेज हो गई है। क्या सरकार को आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार को प्राथमिकता देनी चाहिए?

🔹 समर्थकों का कहना है:

🔹 विरोधियों का कहना है:

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