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श्री प्रभु राम का नाम लेने से अनेक जन्मो में किये पाप नष्ट हो जाते है-संत रामनिवास शास्त्री

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24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। आसपुर मार्ग योगिन्द्र गिरी तलहट पर स्थित श्रीप्रभुदास धाम रामद्धारा मे दिव्य चातुर्मास के तहत रामस्नेही संप्रदाय मेडता के उत्तराधिकारी संत रामनिवासशास्त्री महाराज ने कहा की इस कलयुग में श्री प्रभु राम का नाम लेने से मनुष्य के अनेक जन्मों में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं । संत ने कहा जो मनुष्य आदरपूर्वक उनका स्मरण करते हैं वह तो संसार रूपी समुद्र गाय के खुर से बने हुये गड्ढे के समान पार कर जाते हैं। अर्थात बिना परिश्रम के पार हो जाते हैं रामचंद्रजी ब्रह्म है ,ज्ञान स्वरूप है, अविनाशी हैं ,और सबके हृदय रूपी नगरी में निवास करते हैं । हरी के गुण, नाम ,कथा, रूप अगणित और असीम है। जब धर्म का नाश होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं ब्राह्मण, गो,देवता और पृथ्वी कष्ट पाते हैं तब वे कृपानिधान प्रभु राम अलग-अलग रूप में शरीर धारण करके सज्जनों की पीड़ा हरते हैं। अर्थात जब धर्मका विनाश होता तब भगवान अवतार लेते है। असुरों को मार कर वेदों की मर्यादा की रक्षा करते हैं । मनुष्य को भवसागर पार करने के लिए प्रभु का स्मरण करना चाहिए । जिस तरह से गंगा नदी (भागिरथी ) मे गोते लगाने से मानव को पवित्र करती हे वेसे ही रामचरितमानस मे गोते लगाने से सभी कष्ट दुर हो जाते है। राम कथा कामधेनु कथा है। सारे संशय दुर करने वाली यह रामकथा है। परमात्मा एक ही है।अलग अलग नामो से पुकारा जाता है।यदी दर्पण मैला हो तो चेहरा भी साफ नही दिखाई देगा । दर्पन रुपी मन साफ होना चाहिए। सत्संग के दौरान मुखडा क्या देखें दर्पण मे तेरे दया धर्म नही तेरे मन .. .., भजन पर कहा मन रुपी दर्पण साफ होना चाहिए । सगुण ओर निर्गुण मे कोई भेद नहीं है। भक्तो के प्रेम से सगुण हो जाते है। दरियाव महाराज कहते है कि सगुण ओर निर्गुण एक पिता है एक माता है। भगवान राम सच्चिदानंद है । जहां राम हे वहां काम वासन नही हो सकती। कथा से पूर्व पण्डित विनोद त्रिवेदी के मन्त्रोच्चारण से संत प्रसाद के यजमान .विष्णु भावसार/ जयन्ती लाल भावसार ने पोथी ओर व्यासपीठ का पूजन किया। सत्संग में आर्गन पर केलाश माकड इन्दोर तबले पर लोकेश ठाकुर ओर मंजीरे पर मंगेश भाटी अभिनव साउंड मेडता ने संगत दी। इस अवसर पर धाम के संत उदयराम महाराज, बाल संत अमृतराम दिनेश शर्मा,गोवर्धन शर्मा, जयन्ती लाल मोची, राजेंद्र प्रसाद शुक्ला, हैमंत शुक्ला प्रभाशंकर बरबुदनिया, कोशल्या शर्मा , सुगंधलता शर्मा, केतना सोमपुरा,मधुबाला सोमपुरा,मोनिका भावसार, नैयना त्रिवेदी, निर्मला भावसार, संगीता सोमपुरा सहित रामस्नेही भक्त उपस्थित रहे।

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