उदयपुर। उदयुपर के समीप ग्राम पंचायत तितरड़ी जो उदयपुर–जयसमंद रोड पर स्थित है। वहां पर 1731 के आसपास निर्मित ऐतिहासिक धरोहर “बुर्ज” को आज बिना अनुमति जेसीबी चला कर तोड़े देने का मामला सामने आया है। यह ऐतिहासिक धरोहर वाला स्थल तितरड़ी चौराहे से जयसमंद की ओर, सविना थाने से लगभग केवल एक किलोमीटर दूर मेन रोड पर स्थित था। इतिहासकारों और स्थानीय लोगों ने इसे विरासत के संरक्षण पर सीधा प्रहार बताया व कहा कि आज इतिहास के 295 साल पुराने पन्ने को मिटा दिया गया।
इतिहासकार डॉ. अजात शत्रु सिंह (शिवरती राजपरिवार) ने 24 न्यूज अपडेट को बताया कि तितरड़ी गांव पूर्व में शिवरती ठिकाने का हिस्सा था। इसका उल्लेख प्रथम सेटलमेंट अभिलेखों में भी मिलता है। यहां का गढ़ और यह ऐतिहासिक बुर्ज जलस्रोतों के निकट सुरक्षित स्थान पर बनाए गए थे। उस दौर में जहां पानी होता था वहीं बसावट और सुरक्षा की संरचना होती थी। तितरड़ी उस समय पानी से लबालब था और यहां एक ऐतिहासिक हीरा बावड़ी भी विद्यमान है।
बताया गया कि महाराणा के जमाने में जब राहगीर जयसमंद की ओर से उदयपुर में प्रवेश करते थे तब संध्या के समय शहर की पोलें बंद हो जातीं। उस वक्त वे इसी बुर्ज में विश्राम करते थे। समझने के लिए एक तरह से इसे आप “आधुनिक होटल” भी कह सकते हैं। विशिष्ट अतिथि उस समय तितरड़ी गढ़ में ही ठहरते थे। महाराणा जब जयसमंद शिकार पर जाते या लौटते थे तब अपने लवाजमे के साथ तितरड़ी गढ़ में विश्राम करते, जबकि अन्य जन इस बुर्ज में ही निवास करते थे।
इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि यह बुर्ज अंत में महाराज हमीर सिंह शिवरती के नाम पर रहा। उनके निधन के बाद उनके पुत्र इंदर सिंह और त्रिभुवन सिंह के नाम पर कागजों में दर्ज किया गया। वर्ष 2005 में यह विरासत किसी अन्य को विक्रय कर दी गई।
डॉ. अजात शत्रु सिंह ने कहा कि धरोहरों के संरक्षण संबंधी कानूनों के तहत बिना अनुमति किसी भी ऐतिहासिक संरचना से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। “आज बुर्ज को इसलिए तोड़ दिया गया क्योंकि वह रोड पर आ रही थी। प्रशासन को चाहिए था कि संरक्षण की पहल करता और रोड को अन्य जगह से निकाला जा सकता था। यदि आज 295 वर्ष पुरानी इस धरोहर को यूं मिटा दिया गया, तो कल को अन्य धरोहर भी इसी तरह से मिट जाएगी।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास और विरासत के बीच संतुलन संभव है, बशर्ते प्रशासन संवेदनशीलता दिखाए। सवाल यही है—क्या ऐसी धरोहरों को संजोया जाएगा या सुविधानुसार तोड़ा जाएगा? तोडने वालों पर अब प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा यह देखने वाला होगा। इतिहास गवाह है कि जो समाज अपनी स्मृतियों को नहीं बचाता, वह भविष्य की नींव भी खोखली करता है।
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