उदयपुर, 1 फरवरी। केंद्रीय बजट को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला है। उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने बजट को “दिशाहीन, इच्छाशक्ति-विहीन और समाधान-विहीन” करार देते हुए कहा कि यह दस्तावेज़ देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से आंखें चुराने का उदाहरण है।
राठौड़ ने कहा कि बजट में युवाओं के रोजगार, गरीब और मिडिल क्लास को महंगाई से राहत तथा आम लोगों की घटती बचत जैसे ज्वलंत मुद्दों पर कोई ठोस पहल नहीं दिखाई देती। “हर साल वही वादे, वही जुमले—लेकिन ज़मीनी हकीकत जस की तस है,” उन्होंने कहा। स्मार्ट सिटी योजना पर कटाक्ष करते हुए राठौड़ ने कहा कि जिन शहरों को ‘स्मार्ट’ कहा जा रहा है, वहां पीने का पानी तक सुरक्षित नहीं, लेकिन सरकार आंकड़ों की चमक में सच्चाई छिपा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में बजट कटौती कर सरकार देश को आगे नहीं, बल्कि पीछे धकेल रही है। “हर फंड में कैंची चला कर केवल नंबरों का खेल खेला जा रहा है,” राठौड़ ने कहा।
राजस्थान के साथ अन्याय का आरोप
कांग्रेस के राजस्थान प्रदेश सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉ. संजीव राजपुरोहित ने बजट को राजस्थान के लिए “ऊंची दुकान, फीका पकवान” बताया। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के नाम पर वोट तो लिए गए, लेकिन बजट में राजस्थान के इंजन को ईंधन तक नहीं दिया गया।
डॉ. राजपुरोहित ने सवाल उठाया कि देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल राजस्थान का बजट भाषण में नाम तक न आना प्रदेश के साथ खुला अन्याय है। उन्होंने कहा कि गरीबों, श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के लिए किसी बड़े राहत पैकेज का अभाव है, वहीं महंगाई पर नियंत्रण और रुपये की गिरावट से निपटने को लेकर सरकार पूरी तरह मौन है।
उन्होंने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, “असमानता ब्रिटिश राज के दौर को पार कर चुकी है, लेकिन बजट में उसका जिक्र तक नहीं। यह एक थकी हुई और रिटायर हो चुकी सरकार का बजट है, जिसमें न ऊर्जा है, न दिशा।”
डॉ. राजपुरोहित ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार न केवल राज्यों को पूरा पैसा नहीं देती, बल्कि जो राशि मिलती है, उसके उपयोग में भी गंभीर उदासीनता बरती जाती है। “यह बजट न गरीबों का है, न युवाओं का। इसमें यह तक नहीं बताया गया कि महंगाई कैसे घटेगी और रोजगार कैसे पैदा होंगे,” उन्होंने कहा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि डबल इंजन के शोर के बीच यह बजट राजस्थान और देश—दोनों के लिए निराशा का दस्तावेज़ बनकर रह गया है।
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