24 News Update चित्तौड़गढ़। राज्य बजट में चित्तौड़गढ़ के लिए की गई घोषणाओं में इस बार सबसे अधिक ध्यान गंभीरी नदी पर प्रस्तावित रिवर फ्रंट विकास ने खींचा है। लंबे समय से उठती इस मांग को बजट में स्थान मिलने से यह संकेत जरूर मिला है कि शहरी विकास की योजनाओं में अब नदी और उसके आसपास के क्षेत्र को लेकर ठोस सोच उभर रही है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन और स्वरूप को लेकर अभी कई सवाल खुले हैं।गंभीरी नदी वर्षों से चित्तौड़गढ़ शहर के बीच बहते हुए भी उपेक्षा का शिकार रही है। बजट में रिवर फ्रंट को लेकर की गई घोषणा को शहर के सार्वजनिक स्थलों, पर्यटन और नागरिक उपयोग के नजरिये से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह परियोजना आगे बढ़ती है, तो इससे स्थानीय लोगों के लिए एक नया सार्वजनिक क्षेत्र विकसित हो सकता है और शहर के पर्यावरणीय संतुलन पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।बजट में कुंभा बायोलॉजिकल पार्क के लिए 31 करोड़ रुपये के प्रस्ताव ने भी जिले के लिए नई संभावना जोड़ी है। इस पार्क को लेकर मांग काफी समय से की जा रही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बायोलॉजिकल पार्क और रिवर फ्रंट, दोनों योजनाएं यदि समन्वय के साथ लागू होती हैं, तो पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि संभव है, हालांकि इससे जुड़े रोजगार और आर्थिक प्रभाव वास्तविकता में कितने कारगर होंगे, यह क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।बजट घोषणाओं में युवाओं को लेकर ब्याज-मुक्त ऋण, शिक्षा से जुड़ी सहायता योजनाएं और जलदाय विभाग से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। 30 हजार युवाओं को 10 लाख रुपये तक के बिना ब्याज ऋण की घोषणा को स्वरोजगार से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि स्कूल शिक्षा में यूनिफॉर्म और डिजिटल सहायता से सामाजिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास दिखता है।हालांकि, चित्तौड़गढ़ से जुड़ी कुछ प्रमुख मांगें—जैसे जिला अस्पताल में कैथ लैब, खेल सुविधाओं का विस्तार, दुर्ग के लिए वैकल्पिक मार्ग—अब भी केवल अपेक्षाओं के स्तर पर ही हैं। बजट में इन विषयों को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं होने से यह सवाल बना हुआ है कि बुनियादी और तात्कालिक जरूरतों पर आगे किस स्तर पर निर्णय होंगे।कुल मिलाकर, इस बजट में चित्तौड़गढ़ के लिए विकास की दिशा का संकेत तो मिलता है, लेकिन गंभीरी रिवर फ्रंट सहित अधिकांश घोषणाएं अभी अवधारणा के स्तर पर हैं। आने वाले समय में यह देखा जाना बाकी है कि ये योजनाएं कागज से जमीन तक किस गति और गंभीरता से पहुंच पाती हैं, और क्या वे वास्तव में शहर की जरूरतों से तालमेल बैठा पाती हैं या नहीं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation पीएम श्री महाराणा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बालिकाओं के सशक्तिकरण को लेकर सुरक्षा से सशक्तिकरण तक, मेंटोर-मेंटी मंच से उठी बालिका की आवाज जोधपुर ग्रामीण में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: पटवारी 4 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार