आयड़ तीर्थ व देहली गेट नेमिनाथ मंदिर में चढ़ाई ध्वजा व लड्डू– सवा पांच किलो का चढ़ाया जन्म कल्याणक लड्डू – गाजे-बाजे के साथ निकली विशाल शोभायात्रा 24 News Update उदयपुर । श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ एवं देहली गेट स्थित नेमिनाथ जैन मंदिर पर मूलनायक नेमिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सवध्व धूमधाम से मनाया गया। जिसमें आयड़ तीर्थ पर बिराजित कला पूर्ण सूरी समुदाय की साध्वी जयदर्शिता श्रीजी, जिनरसा श्रीजी, जिनदर्शिता श्रीजी व जिनमुद्रा श्रीजी महाराज, सूरजपोल दादावाड़ी मंदिर की साध्वी विपुल प्रभा जी, थोब की बाड़ी में बिराजित उपेन्द्रयशा श्रीजी आदि ठाणा के सानिध्य में मंगलवार को नेमिनाथ भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव एवं मंदिर पर ध्वजा परिवर्तन सहित विविध आयोजन हुए । महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि पाश्र्व वल्लभ सेवा ममण्ड की बहिनों द्वारा सत्राह भेदी पूजा पढ़ाई गई। गाजे-बाजे की स्वर लेहरियां बिखेरती हुई विशाल शोभायात्रा देहली गेट स्थित नेमिनाथ जैन मंदिर पहुंची जहां चांदमल जयश्री बागरेचा व हिम्मत सिंह निर्मल मुर्डिया द्वारा मूलनायक नेमिनाथ भगवान को सवा पांच किलों का जन्मकल्याणक लड्डू व ध्वजा परिवर्तन चढ़ाया गई। आरती मंगल दीपक संघवी अर्जुनलाल ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक जैन ने की। इस अवसर पर कुलदीप नाहर, भोपाल सिंह नाहर, चन्द्र सिंह बोल्या, मनोहर सिंह नलवाया, रवि देरासरिया, फतह सिंह नलवाया, रणवीर मादरेचा,सुभाष मेहता, सुरेन्द्र नलवाया, चतर सिंह पामेच, सतीश कच्छारा, प्रकाश नागोरी, अशोक जैन, राजेन्द्र जवेरिया, दिनेश बापना, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, गोवर्धन सिंह बोल्या, दिनेश भण्डारी, रविन्द्र बापना, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोया, कुलदीप मेहता आदि मौजूद रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation मुकुट सप्तमी महामहोत्सव 31 जुलाई को, लड्डू सजाओं प्रतियोगिता का होगा आयोजन मायावी व्यक्ति का जीवन मुख में राम और बगल में छुरी जैसा होता है : जैनाचार्य रत्नसेन सूरीश्वर महाराज