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प्राकृतिक खेती के लाभप्रद मॉडल विकसित करने होंगे – डॉ. मेहता

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24 News update उदयपुर. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के तत्वावधान में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित “प्राकृतिक खेती में अनुसंधान और नवाचार” विषय पर 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन अनुसंधान निदेशालय, उदयपुर में हुआ।

समापन समारोह की अध्यक्षता पूर्व कुलपति डॉ. एस. एल. मेहता ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती को कृषकों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए वैज्ञानिकों और प्रसार अधिकारियों को लाभप्रद मॉडल विकसित करने होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि गांवों के समूह बनाकर सामूहिक रूप से प्राकृतिक खेती को अपनाने और जैविक उत्पादों के लिए FPOs (किसान उत्पादक संगठन) बनाने की आवश्यकता है। साथ ही, कृषि में रसायनों के उपयोग से होने वाले प्रदूषण को कम करने हेतु कृषकों को अधिक अनुदान और सुविधाएं देकर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए

कार्यक्रम में छह राज्यों के 25 वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. अरविंद वर्मा, निदेशक अनुसंधान एवं कोर्स डायरेक्टर ने अतिथियों का स्वागत किया और प्रशिक्षण का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण वैज्ञानिकों के लिए प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श और विश्लेषण का मंच साबित हुआ

प्रशिक्षण के दौरान –
33 सैद्धांतिक व्याख्यान
8 प्रयोगात्मक प्रशिक्षण सत्र
6 अध्ययन भ्रमण आयोजित किए गए।

इस कार्यक्रम में डॉ. आर. एल. सोनी, निदेशक (प्रसार शिक्षा निदेशालय), डॉ. अमित त्रिवेदी, क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान, उदयपुर सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। डॉ. रविकांत शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया और डॉ. लतिका शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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