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जो मिला है उसमें खुश रहो, दूसरों से जलकर कुछ मिलने वाला नहीं है – पुलक सागर

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31 जुलाई को होगा मोक्ष सप्तमी का ऐतिहासिक कार्यक्रम, भारत में पहली बार भगवान का साक्षात् समवशरण निकलेगा शोभायात्रा में

24 News Update उदयपुर । सर्वऋतु विलास स्थित महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में राष्ट्रसंत आचार्यश्री पुलक सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास भव्यता के साथ संपादित हो रहा है। सोमवार को टाउन हॉल नगर निगम प्रांगण में 27 दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के नवें दिन नगर निगम प्रांगण में विशेष प्रवचन हुए। चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विनोद फान्दोत ने बताया कि सोमवार को प्रवचन से पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत चित्र अनावरण, द्वीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट एवं पाद प्रक्षालन एवं मंगलाचरण द्वारा की गई । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जीबीएच अमेरिकन हॉस्पिटल के संस्थापक डॉ. कीर्ति जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीआईडी सीबी गोपाल मेवाड़ा, सिंधी समाज प्रमुख प्रताप राय चुग, कांग्रेस जिलाध्यक्ष फतह सिंह राठौड़, अध्यक्ष जीतो लेडीज विंग अंजलि सुराणा, दसा नागदा समाज सेठ शांतिलाल गदावत एवं दसा हुमड़ समाज अध्यक्ष सुंदरलाल डागरिया थे ।
चातुर्मास समिति के परम संरक्षक राजकुमार फत्तावत व मुख्य संयोजक पारस सिंघवी ने बताया कि ज्ञान गंगा महोत्सव के नवें दिन आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहा दूसरे के सुख को देखकर दुखी होते हो जीवन में, तुम्हारा दुख ये नहीं कि तुम्हारा एक मंजिल का मकान है, तुम्हारा दुख ये है कि पडौसी के तीन मंजिल का मकान है । शांति से जियो, आपके आपस जो है उसमें खुश रहिए । एक संत की कुटिया में जिज्ञासु पहुंचा, कहा कबीर दास जी आप हमेशा हंसते हुए रहते है, मस्त रहते है । कबीर ने कहा एक रात मेरी कुटिया में रुक जा, उसने कहा कि आपकी खुशी का राज क्या है । कबीर दास जी ने कहा चल तू मेरे साथ बाहर और कहा देख सामने एक नारियल का पेड़ लगा है और गुलाब का पौधा लगा है । जब आती है तो दोनों झूमते है । गुलाब के पौधे ने कभी नहीं चाहा कि मैं नारियल का पेड़ बन जाऊ, और ना कभी नारियल के पेड़ ने ऐसा चाहा कि मैं गुलाब का पौधा बन जाऊ । इसलिए आप जैसे हो जहां हो उसमें खुश रहो, किसी और को देखकर परेशान होने या जलने से कुछ मिलने वाला नहीं है । एक दूसरे पर टीका टिप्पणी ना करे, छींटा कसी ना करे । जिसमें हो वैसे रहो । आंसू बहाने से खुशियां नहीं मिलती, जिंदगी मै सर उठा कर जियो, थोड़ा सा दु:ख और तकलीफ आई, और परेशान हो जाते हो । हाथ को माथे पर रखोगे तो किस्मत खराब हो जाएगी और हाथ अगर प्रभु के चरणों में रख दोगे तो किस्मत बदल जाएगी । मंदिर का भगवान केवल उसकी मदद करता है, जो खुद अपनी मदद करना जानते है । संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता है । जिंदगी में दो रास्ते मिलेंगे आपको, एक रास्ता सरल मिलता है और एक कठिन । यदि आप सरल रास्ता चुनते है तो आप सामान्य इंसान रहेंगे और आप कठिन रस्ता चुनते है, तो भविष्य में आपकी श्रेणी महापुरुषों में हुआ करती है । लचीला जीवन त्यागो, स्वयं को स्थापित करो । जीवन में लम्बाई का कोई महत्व नहीं है, जीवन को गहरा बनाओ ।

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